MP News: शहडोल जिले के बोडरी ग्राम पंचायत के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में उस समय हड़कंप मच गया जब पढ़ाई के दौरान अचानक छत गिर गई। इस हादसे के समय कक्षा एक से पांच तक के 33 बच्चे स्कूल में मौजूद थे। लेकिन सौभाग्य से किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई क्योंकि बच्चों ने खतरे को भांपते हुए समय रहते भागकर अपनी जान बचा ली। यह हादसा एक बड़े प्रशासनिक लापरवाही की कहानी भी कहता है।
शिक्षकों की चेतावनी हुई नजरअंदाज
स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने पिछले साल ही प्रशासन को स्कूल की जर्जर हालत को लेकर जानकारी दी थी। छत में दरारें पड़ गई थीं और खतरे का अंदेशा पहले से था। इस बारे में विभागीय अधिकारियों को लिखित में भी बताया गया था लेकिन अफसोस कि किसी ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। अगर बच्चे समय रहते बाहर नहीं भागते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

25 साल पुरानी इमारत अब जर्जर
बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन साल 1999-2000 में बना था। यानी लगभग 25 साल पुराना है। समय के साथ भवन की हालत खराब होती चली गई और मरम्मत की आवश्यकता थी। पिछले साल शिक्षकों ने छत की मरम्मत भी कराई थी लेकिन पूरे भवन की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई बड़ी मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कदम नहीं उठाया।
बच्चों और अभिभावकों में डर का माहौल
इस हादसे के बाद बच्चों के मन में डर बैठ गया है। अब वे स्कूल जाने से डर रहे हैं। वहीं अभिभावकों की भी चिंता बढ़ गई है। कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को ऐसी खस्ताहाल इमारत में पढ़ने नहीं भेजना चाहता। यह लापरवाही केवल एक हादसा नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की अनदेखी और उपेक्षा को दर्शाती है।
अब निजी भवन में चलेंगी कक्षाएं
शहडोल प्रशासन का कहना है कि हादसे की जानकारी मिलते ही जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। जब तक स्कूल की मरम्मत या नया भवन तैयार नहीं हो जाता तब तक छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो इसलिए कक्षाएं एक निजी भवन में संचालित की जाएंगी। हालांकि अब बड़ा सवाल ये है कि क्या प्रशासन भविष्य में ऐसे जर्जर स्कूलों की समय रहते जांच करेगा या फिर कोई नया हादसा होने का इंतज़ार करेगा।


