MP Plant Scam: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम की बागवानी शाखा से एक नया घोटाला सामने आया है जिसे अब लोग ‘पौधा घोटाला’ कह रहे हैं। RTI से मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ तीन महीनों में पेड़ पौधों, खाद, रासायनिक उर्वरकों और मशीनों की खरीद पर ₹8.26 लाख खर्च किए गए। ये आंकड़ा तब चौंकाता है जब ये खर्च सिर्फ एक ही फर्म से 9 बार कोटेशन पास करके किया गया हो।
RTI से हुआ पर्दाफाश, नियम ताक पर
RTI एक्टिविस्ट अजय पाटीदार ने इस पूरे मामले का खुलासा किया है। उन्होंने जब बागवानी शाखा से कोटेशन पर की गई खरीद की जानकारी मांगी तो पाया गया कि नियमों को ताक पर रखकर कई सामग्री खरीदी गई। पेड़, कार्पेट घास, गोबर खाद, ट्री कटर मशीन और केमिकल फर्टिलाइज़र जैसी चीज़ें एक ही फर्म से बार-बार कोटेशन के ज़रिए खरीदी गईं।

पूर्व अधिकारी की फर्म को मिले सभी ऑर्डर
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बागवानी शाखा से जितनी भी खरीद की गई वह सभी भगवती एंटरप्राइजेस भोपाल नामक एक ही फर्म से की गई। यह फर्म भगवती प्रसाद कंडवाल, पूर्व बागवानी अधीक्षक की है। इतना ही नहीं, इस फर्म से रासायनिक खाद और दवाइयां भी खरीदी गईं जबकि उनके पास इन्हें बेचने का लाइसेंस तक नहीं है।
दोहरी कीमत पर हुई आपूर्ति, बिना टेंडर के खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि रासायनिक दवाइयों और खाद को निगम को दोगुनी कीमत पर सप्लाई दिखाया गया। जुलाई 2024 में इस फर्म से ₹3.76 लाख के पौधे और घास की खरीद चार अलग-अलग कोटेशन के जरिए की गई। जबकि नियमानुसार इतनी राशि के लिए एक ही टेंडर किया जा सकता था। ऐसा जानबूझकर टेंडर प्रक्रिया से बचने और पूर्व अधिकारी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया।
क्या अब भी होगी केवल जांच या होगा एक्शन?
भोपाल नगर निगम में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पेंट घोटाला, आयुष्मान घोटाला और सांप पकड़ने के नाम पर घोटाला सामने आ चुका है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस पौधा घोटाले पर भी केवल जांच तक ही बात सीमित रहेगी या दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता अब जानना चाहती है कि क्या अफसरों की जेबें भरने के लिए सरकारी योजनाओं को इसी तरह लूटा जाएगा?


