MP Politics: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में अब पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने शहर में सप्लाई हो रहे पानी पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लेकर एक बड़ा “वॉटर बम” फोड़ा है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। कांग्रेस का दावा है कि इंदौर का पानी अब स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं रहा और यह लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इस मुद्दे के सामने आने के बाद शहर में पानी की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है और आम नागरिक भी चिंतित नजर आ रहे हैं।
जल ऑडिट रिपोर्ट में 90 प्रतिशत सैंपल फेल होने का दावा
इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी द्वारा कराए गए “जल ऑडिट” की रिपोर्ट सार्वजनिक की। उन्होंने दावा किया कि 26 दिनों तक चले इस ऑडिट में शहर के अलग-अलग इलाकों से 240 पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। पटवारी ने कहा कि जांच में सामने आया है कि शहर का पानी धीरे-धीरे “साइलेंट किलर” बनता जा रहा है। उनके अनुसार यह स्थिति बेहद गंभीर है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
खतरनाक बैक्टीरिया और जहरीले तत्व मिलने का गंभीर आरोप
कांग्रेस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि कई क्षेत्रों के पानी के नमूनों में खतरनाक बैक्टीरिया और जहरीले तत्व पाए गए हैं। जीतू पटवारी ने कहा कि यह स्थिति गंभीर बीमारियों से लेकर मौत तक का कारण बन सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि यह जांच सर्टिफाइड लैब और दिल्ली की ऑथेंटिक लैब में कराई गई है, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। प्रेस वार्ता में उन्होंने भागीरथपुरा क्षेत्र के गंदे पानी कांड का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि वहां हुई मौतों को लेकर सरकार और नगर निगम ने गंभीरता नहीं दिखाई।
सरकार पर निशाना और स्वतंत्र जांच की मांग तेज
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार और नगर निगम पर सीधा हमला बोला है। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सुदामा नगर जैसे इलाकों में, जहां महापौर का निवास भी है, वहां का पानी भी जांच में फेल पाया गया है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जल ऑडिट कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस की रिपोर्ट गलत साबित होती है तो सरकार उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकती है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है और शहर में पानी की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है।


