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खुशखबरी… MP में ब्यूरोक्रेसी को कसने की नई कवायद, गांवों और तहसीलों में चौपाल लगाने की तैयारी

 

भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में हाल के बदलावों के तहत, नए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी को कसने की कवायद शुरू की है। प्रशासन में सुधार के इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य है कि कलेक्टर और अन्य अधिकारी सीधे ग्रामीण इलाकों में जाकर स्थानीय समस्याओं का समाधान करें। यह पहल तब हुई है, जब सत्तापक्ष के कई विधायक प्रशासनिक कार्यशैली से नाराज़ हैं, जिससे सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य सचिव का निर्देश…

अनुराग जैन ने कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से गांवों और तहसीलों में चौपाल लगाएंगे। इस पहल के तहत कलेक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जनता के साथ संवाद करने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का आदेश दिया गया है। दीपावली के बाद कलेक्टरों और कमिश्नरों की एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाएगी, जिसमें सुशासन पर चर्चा की जाएगी। कलेक्टर द्वारा तहसील और गांवों में चौपाल लगाने का निर्णय प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

इससे कई लाभ हो सकते हैं-

जनता की आवाज़ को सुना जाना: लोगों को अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे प्रशासन के सामने रखने का मौका मिलेगा।
शिकायतों का तुरंत निवारण: कई बार स्थानीय समस्याएं छोटी-छोटी होती हैं, जिन्हें मौके पर ही हल किया जा सकता है। चौपाल में इन समस्याओं का तुरंत निवारण किया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार: लोगों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी जा सकती है और उन्हें इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
जवाबदेही बढ़ाना: प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जा सकता है और उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सकती है।
ग्रामीण विकास में तेजी: लोगों की भागीदारी से ग्रामीण विकास के लिए योजनाएं बनाई जा सकती हैं और उनका प्रभावी क्रियान्वयन किया जा सकता है।

सड़कें, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं
कृषि से संबंधित समस्याएं
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं
भूमि विवाद और अन्य कानूनी समस्याएं
सामाजिक समस्याएं जैसे दहेज, बाल विवाह आदि

विधायकों की नाराज़गी…

राज्य के कई बीजेपी विधायक हाल के दिनों में प्रशासन, विशेषकर पुलिस से नाराज़गी व्यक्त कर चुके हैं। कुछ विधायक तो पुलिस के सामने प्रदर्शन करने तक पहुंचे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस नाराज़गी का प्रभाव यह है कि प्रशासन की कार्यक्षमता में कमी आ रही है और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। बीजेपी विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने कहा कि मुख्य सचिव ने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए जमीनी स्तर पर सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह बदलाव उन विधायकों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो अपनी जनता के बीच अपनी छवि को सुधारना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य की ब्यूरोक्रेसी में सुधार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। रिटायर्ड IAS अधिकारी डीएस राय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सुशासन की पाठशाला हर स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी अधिकारियों को केवल ऑफिस में बैठकर काम करने के बजाय जमीन पर जाकर वास्तविक समस्याओं का समाधान करना चाहिए। वहीं, विपक्ष का कहना है कि केवल योजनाएं बनाने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि कलेक्टरों की टेबल पर फाइलों का ढेर लगा है और आम लोगों की समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है। विपक्षी नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि केवल बातें करने से ही स्थिति में सुधार नहीं आएगा; ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

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