(विष्णु परिहार नीमच): नीमच जिले में केंद्र और राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही जल विद्युत परियोजना के तहत किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहण करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इस विरोध का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य आर. सागर कछावा कर रहे हैं, जो पिछले 9 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके स्वास्थ्य में गिरावट देखी गई है, लेकिन उन्होंने अपनी 16 मांगों के निराकरण तक अनशन जारी रखने का संकल्प लिया है।
ग्रामीणों का आरोप और अनशन की वजह
आर. सागर कछावा और ग्रामीणों का आरोप है कि चीता प्रोजेक्ट के नाम पर मनासा ब्लॉक में चरनोई की जमीनें प्रशासन द्वारा तीन-तीन किलोमीटर तक अधिग्रहित कर बाड़ाबंदी कर दी गई है। इससे पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है, जिससे हजारों पशुओं की मौत हो चुकी है और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। इसके अलावा, खीमला ब्लॉक में जल विद्युत परियोजना के नाम पर किसानों की जमीनें बिना उनकी सहमति के जबरन ली गई हैं और मुआवजे में मनमानी की गई है। इन आरोपों के साथ ही तत्कालीन कलेक्टर दिनेश जैन पर एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की जा रही है।
आंदोलन और प्रशासन की प्रतिक्रिया
बुधवार को मनासा में सर्व समाज के बैनर तले ग्रामीणों ने एक बाइक रैली निकाली और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
एसडीएम पवन बारिया ने बताया कि स्थानीय स्तर पर जो मांगें पूरी की जा सकती हैं, उन पर कार्य किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों को शासन स्तर पर निराकरण के लिए भोपाल भेजा गया है। इसके अलावा, प्रशासन की ओर से आर. सागर कछावा के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जा रही है।
ग्रामीणों और आर. सागर कछावा ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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