PM Narendra Modi ने एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने अब तक 17 देशों की संसदों को संबोधित किया है। ये संख्या कांग्रेस के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा किए गए विदेश संबोधनों के कुल योग के बराबर है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अब तक कांग्रेस से जुड़े पांच प्रधानमंत्रियों — मनमोहन सिंह (7 बार), इंदिरा गांधी (4 बार), जवाहरलाल नेहरू (3 बार), राजीव गांधी (2 बार) और पीवी नरसिम्हा राव (1 बार) — ने कुल मिलाकर 17 बार विदेशों की संसदों को संबोधित किया था।
पीएम मोदी ने न केवल विकसित देशों की संसदों को संबोधित किया है बल्कि विकासशील देशों की संसदों में भी भारत की आवाज बुलंद की है। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव, मंगोलिया, फिजी, गुयाना, युगांडा और मॉरिशस जैसे देशों में संसद सत्रों को संबोधित किया है। हाल ही में अपने पांच देशों के दौरे में उन्होंने घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और नामीबिया की संसदों में भी भाषण दिया।

‘डायलॉग और साझेदारी’ से बनेगा नया विश्व
नामीबिया की संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाला भविष्य शक्ति और वर्चस्व पर नहीं बल्कि साझेदारी और संवाद पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने अफ्रीका को केवल कच्चे माल का स्रोत मानने की सोच को बदलने की बात कही और उसे वैल्यू एडिशन और सतत विकास का नेतृत्वकर्ता बनाने का आह्वान किया। मोदी का यह दृष्टिकोण वैश्विक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत-अफ्रीका संबंधों को नई ऊंचाई
मोदी ने अपने भाषण में भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को याद किया और उन्हें भविष्य में और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत की अफ्रीका में विकास साझेदारी 12 अरब डॉलर से अधिक की है लेकिन इसका असली मूल्य साझा विकास और उद्देश्य में है। उन्होंने स्थानीय कौशल विकास, रोजगार सृजन और नवाचार को समर्थन देने की बात भी कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्व भर की संसदों को संबोधित करना इस बात का संकेत है कि भारत आज वैश्विक राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। भारत न केवल ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधि बनकर उभरा है बल्कि विकसित देशों के साथ भी मजबूत रणनीतिक भागीदारी बना रहा है। मोदी की यह पहल भारत की विदेश नीति में संवाद, विश्वास और समानता की भावना को मजबूती देती है।


