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प्रदेश में छात्रों को कोर्स की मनीयत के लिए भेजा जायेगा प्रस्ताव

ग्वालियर।  जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में सोमवार को स्थाई समिति की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एमबीबीएस और आयुर्वेद से संबंधित कोर्स शुरू करने को लेकर चर्चा की गई। इन दोनों कोर्सों की मान्यता लेने को लेकर प्रस्ताव इसी माह भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा एग्रीकल्चर कोर्स शुरू करने से पहले फैकल्टी बनाना होगी। इसे लेकर प्रस्ताव समन्वय समिति को भेजा गया है। बैठक में विवि की अध्ययनशालाओं में चलने वाले एमसीए, एमबीए कोर्सों के संचालन को लेकर एआइटीएस को अंडरटेकिंग भेजने को लेकर चर्चा की गई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। इसलिए आज फिर से बैठक होगी। इनके अलावा अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

 आत्मदृष्टि आनंद क्लब ने सोमवार को बोर्ड परीक्षा निरस्त हो जाने के कारण छात्र जीवन पर प्रभाव विषय पर वेबिनार रखा। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में कन्या विद्यालय थाटीपुर के प्राचार्य राजीव बंथरिया मौजूद थे। उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा निरस्त हो जाने से टापर विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिलेगा। इसके फायदा औसत अंक लाने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा। सरकार के इस निर्णय से टापर नुकसान में रहेंगे। इसी क्रम में मुख्य वक्ता ओपी दीक्षित ने कहा कि आनलाइन कक्षाओं से विद्यार्थियों का नैतिक विकास ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। उनकी दिनचर्या अव्यवस्थित हो चुकी है। अंबाह स्थित एक स्कूल के प्राचार्य आलोक सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र व राज्य शासन ने परीक्षा परिणाम के जो मापदंड बनाए हैं, वे उच्च अंक पाने वाले विद्यार्थी के लिए उचित नहीं होंगे। डा.अतुल कुमार रायजादा ने कहा कि शिक्षा की स्पष्ट नीति हो, जिसमें शिक्षा का उद्देश्य स्पष्ट हो। इसी क्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

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