आतंकियों की तलाश के बीच हुआ हादसा, देश ने खोया एक बहादुर अधिकारी
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से आई एक दुखद खबर ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में शामिल एक युवा सेना अधिकारी ने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवा दी। यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि देश सेवा के दौरान दिए गए सर्वोच्च बलिदान की कहानी भी है।
ऑपरेशन शेरुवाली में जुटे थे सुरक्षा बल
राजौरी जिले के डोरिमाल और गंभीर मुगलान बेल्ट में पिछले कई दिनों से ‘ऑपरेशन शेरुवाली’ चलाया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी आतंकवादी इलाके के घने जंगलों में छिपे हुए हैं। इसके बाद सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर सर्च अभियान शुरू किया।
तलाशी अभियान के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
शनिवार शाम सुरक्षा बल दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रहे थे। इसी दौरान लेफ्टिनेंट बेरेशवार गोस्वामी का पैर फिसल गया और वे लगभग 30 मीटर गहरी खाई में गिर गए। साथी जवानों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और उन्हें बाहर निकाला। हालांकि गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सेना ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
शहीद अधिकारी के निधन पर सेना ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उनका साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा प्रेरणादायक थी। पहाड़ों, जंगलों और चुनौतीपूर्ण इलाकों में काम करते हुए उन्होंने हमेशा अपने दायित्व को सर्वोपरि रखा।
कठिन इलाकों में ड्यूटी की असली चुनौती
जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आतंक विरोधी अभियान केवल सुरक्षा चुनौती नहीं होते बल्कि प्राकृतिक जोखिम भी साथ लेकर आते हैं। ऊंचे पहाड़, गहरी खाइयां और कठिन मौसम सैनिकों के सामने हर दिन नई परीक्षा खड़ी करते हैं। ऐसे हालात में काम करना असाधारण साहस की मांग करता है।
आतंकियों की तलाश जारी
लेफ्टिनेंट गोस्वामी के शहीद होने के बावजूद ऑपरेशन शेरुवाली जारी है। सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में लगातार जंगलों की घेराबंदी कर रहे हैं। ड्रोन, निगरानी उपकरण और अतिरिक्त जवानों की मदद से पूरे क्षेत्र पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
लेफ्टिनेंट बेरेशवार गोस्वामी का बलिदान देश के लिए समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उनका साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ऐसे वीर सैनिकों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूल पाएगा।


