Samvidhan Hatya Diwas: संविधान हत्या दिवस पर इंदौर में जुटेंगे लोकतंत्र सेनानी, आज इंदौर तो कल भोपाल में दिखेगा बड़ा जनसैलाब

Samvidhan Hatya Diwas: जून भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा दिन है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसी दिन वर्ष 1975 को देश में आपातकाल (Emergency) लागू किया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता को बचाने के लिए संविधान की मर्यादाओं को दरकिनार कर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल दिया था। प्रेस की आज़ादी छीन ली गई थी और असहमति की हर आवाज़ को जेलों में बंद कर दिया गया था। इस भयावह दौर को आज पूरा 50 वर्ष हो गए हैं लेकिन आज भी यह तारीख भारतीय जनमानस के दिल में एक काले धब्बे के रूप में दर्ज है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई पीड़ा और आक्रोश

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह दिन लोकतंत्र पर एक अमिट दाग है और इसे अंजाम देने वाले लोग इस कलंक से कभी मुक्त नहीं हो सकते। उन्होंने बताया कि आपातकाल को भूलना संभव नहीं है क्योंकि उस समय निर्दोष लोगों को जेलों में ठूंसा गया और मानवाधिकारों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए जो संघर्ष हुआ वह इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है जिसे हर पीढ़ी को जानना चाहिए।

Samvidhan Hatya Diwas: संविधान हत्या दिवस पर इंदौर में जुटेंगे लोकतंत्र सेनानी, आज इंदौर तो कल भोपाल में दिखेगा बड़ा जनसैलाब

लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान: जिनकी वजह से आज हम आज़ाद हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया जिन्होंने उस समय अपनी जान की परवाह किए बिना लोकतंत्र की रक्षा की। उन्होंने कहा कि अनेक लोग जेलों में रहे और उन्हें अपमान, पीड़ा और यातनाएं सहनी पड़ीं लेकिन वे डटे रहे। डॉ. यादव ने बताया कि 25 जून को इंदौर और 26 जून को भोपाल में वे स्वयं ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे जहां लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे योद्धाओं का योगदान सदैव इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

काला दिवस: युवा पीढ़ी को जानना चाहिए सच्चाई

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उस दौर की हकीकत से परिचित कराना बेहद ज़रूरी है। यह काला दिन सिर्फ इतिहास नहीं है बल्कि एक चेतावनी है कि सत्ता के लालच में कोई व्यक्ति या दल फिर कभी लोकतंत्र का गला न घोंट सके। उन्होंने इसे ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं है बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लेने का दिन है।

आशा और चेतावनी: फिर कभी न लौटे ऐसा समय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंत में यह संदेश दिया कि अब जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन चुका है, हमें यह सुनिश्चित करना है कि फिर कभी ऐसा समय न लौटे। उन्होंने उम्मीद जताई कि 25 जून जैसी तारीखें दोबारा न आएं और लोकतंत्र की नींव को कभी भी डगमगाने न दिया जाए। यह दिन हमें संविधान की गरिमा, जनता के अधिकारों और लोकतंत्र की शक्ति को याद दिलाता है।

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