सिंधिया समर्थक विधायक को कोर्ट से झटका, अगली सुनवाई इस दिन

ग्वालियर। ग्वालियर अंचल के अशोकनगर से भाजपा विधायक व सिंधिया समर्थक जजपाल सिंह जज्जी को ग्वालियर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जज्जी के जाति प्रमाणपत्र को गलत बताते हुए निर्वाचन को चुनौती देते हुए भाजपा नेता लड्‌डूराम कोरी ने याचिका लगाई है। इसी याचिका पर विधायक जज्जी ने स्टे की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन से जस्टिस सुनीता यादव ने ठुकरा दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 4 मई को होगी।

 

 

BJP नेता लड्डूराम ने चुनाव याचिका दायर करते हुए अशोकनगर विधायक जज्जी के निर्वाचन को चुनौती दी है। भाजपा नेता लड्डूराम 2018 में कांग्रेस उम्मीदवार जजपाल सिंह जज्जी के खिलाफ चुनाव लड़े थे और पराजित हुए थे। 2019 में उन्होंने चुनाव याचिका दायर करते हुए जजपाल सिंह के निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की। उनके एडवोकेट संगम जैन ने बताया कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जाति) के आधार पर जजपाल सिंह ने चुनाव लड़ा है। याचिका में इसी आधार पर निर्वाचन निरस्त कराने की मांग की गई है, जबकि साल 2020 में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल होने के बाद जज्जी भी भाजपा में आ गए थे।

 

साल 2020 के उपचुनाव में भाजपा से टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर जीते थे। भाजपा नेता लड्‌डूराम की याचिका पर विधायक जज्जी ने आवेदन पेश कर याचिका की सुनवाई पर स्टे करने का आग्रह किया। आवेदन में कहा गया कि जाति प्रमाण पत्र की वैधता के मामले में मप्र हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में प्रकरण विचाराधीन है। डिवीजन बेंच ने ही जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। ऐसे में जब एक प्रकरण की डिवीजन बेंच में सुनवाई चल रही है तो सिंगल बेंच चुनाव याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती । हाईकोर्ट ने विधायक जज्जी के आवेदन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

 

जजपाल सिंह के बनवाए सभी जाति प्रमाण पत्रों को कोर्ट में पेश किया जा चुका है। जज्जी ने कीर जाति का प्रमाण पत्र बनवाया था। यह जाति पंजाब प्रांत में अनुसूचित जाति की श्रेणी में आती है, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सामान्य वर्ग में आती है। इसलिए जजपाल सिंह को मध्यप्रदेश में आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। वह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और इनका प्रमाण पत्र वहीं बनेगा और मान्य होगा।

 

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