अस्पताल में अजीबोगरीब मामला, कागज पर एक्सरे की इमेज प्रिंट कर रहे रेडियोग्राफर

ग्वालियर। जिला स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। यहां पर पिछले एक महीने से एक्सरे फिल्म की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में मरीजों को कागज पर फिल्म निकालकर दी जा रही है, जिसके आधार पर डाक्टर मरीज का उपचार भी कर रहे हैं। हालांकि उन्हें इस सब में परेशानी आ रही है, लेकिन फिर भी डाक्टर कागज पर निकले एक्सरे के आधार पर मरीज का आपरेशन तक कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी मेडिसिन, चेस्ट एवं टीबी के डाक्टरों को एक्सरे से बीमारी का आंकलन करने में आ रही है। इस परेशानी को सिविल सर्जन के सामने मरीज से लेकर डाक्टर तक रख चुके, लेकिन एक्सरे फिल्म उपलब्ध नहीं। इसलिए फोटो निकालने वाले कागज पर एक्सरे फिल्म दे रहे हैं।

हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. विपिन गोस्वामी का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से जो हड्डी के मरीज भिंड से आते हैं वह कागज पर ही एक्सरे की फिल्म लेकर आ रहे हैं। पिछले एक महीने से हमारे यहां पर भी कागज पर एक्सरे निकाले जा रहे हैं। इधर आरएमओ डा. आलोक पुरोहित का कहना है कि वह तो पिछले एक साल से दांतों का एक्सरे कागज पर करते हुए आ रहे हैं उसी के आधार पर मरीज का उपचार दिया जाता है। इस मामले को सिविल सर्जन के सामने भी रख चुके लेकिन उनका कहना है कि कागज पर डाक्टर सब देख लेता है जिसे देखना आता है। भोपाल से प्लास्टिक सीट की उपलब्धता नहीं हो पा रही है।

संक्रमण पता लगाना कठिन हड्डी का एक्सरे कागज पर देखने में समझ में आ जाता है क्योंकि हड्डी अलग से टूटी नजर आती है। लेकिन समस्या उन डाक्टरों के सामने होती है जिन्हें संक्रमण देखना होता है। फेंफड़ों में कितने फीसद संक्रमण है यह कागज की फिल्म पर दिखाई नहीं देता। इसी तरह से अन्य स्थानों का एक्सरे करने से मेडिसिन, सर्जन, टीबी एंड चेस्ट के डाक्टरों की बीमारी का सही आंकलन करने में परेशानी हो रही है।

जल्द आने वाली डिजिटल एक्सरे मशीन जिला अस्तपाल को जल्द ही डिजिटल एक्सरे मशीन मिलने जा रही है। इसके लिए अलग से कक्ष भी तैयार कर दिया गया है। अगले दस से 15 दिन में यह मशीन जिला अस्पताल पहुंच जाएगी। इस मशीन की मदद से अच्छी गुणवत्ता के साथ काम होगा और इसके साथ में प्लास्टिक सीट भी आएंगी, इसलिए कोई समस्या भी नहीं रहेगी।

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