इंदौर। लिवर को शरीर का डिटॉक्स पावरहाउस कहा जाता है, जो खराब डाइट, टॉक्सिन, तनाव और दवाइयों के दुष्प्रभावों से प्रभावित होता है। इन कारणों से ब्लोटिंग, वजन बढ़ना, थकान और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
लिवर की खासियत यह है कि यह 75% तक डैमेज होने के बावजूद खुद को पुनर्जीवित कर सकता है। हालांकि, लिवर डैमेज होने से पहले कुछ स्पष्ट लक्षण दिखने लगते हैं।
लिवर डैमेज के लक्षण
1. रात में पसीना आना – फैटी लिवर, लिवर कैंसर या प्रायमरी स्क्लेरोसिंग कॉलिंजाइटिस जैसी समस्याओं के कारण।
2. देर से नींद आना – हेपेटिक इंसेफेलोपैथी की वजह से सर्केडियन साइकिल प्रभावित होती है।
3. इन्सोम्निया- लिवर की बीमारी से शरीर का तापमान और ग्लूकोज लेवल असंतुलित हो सकता है, जिससे नींद न आने की समस्या होती है।
4. बार-बार नींद टूटना – लिवर समस्याओं से सर्केडियन साइकिल और थर्मोरेगुलेशन प्रभावित होते हैं, जिससे घ्रेलिन हार्मोन का स्तर बदलता है और नींद बार-बार टूटती है।
लिवर की बीमारी में स्लीप मैनेजमेंट टिप्स
-शराब या नशे से परहेज करें शराब लिवर के लिए हानिकारक होती है और यह फैटी लिवर और फाइब्रोसिस का मुख्य कारण है।
-स्लीपिंग एंबियंस सुधारें साफ बिस्तर और तकिए का इस्तेमाल करें, कमरे में मद्धम रोशनी रखें और शांत माहौल बनाएं।
-मेडिटेशन या म्यूजिक अगर नींद न आए तो स्लीपिंग मेडिटेशन या धीमे संगीत का सहारा लें।
-स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तेल, मसाला, चीनी और नमक का कम सेवन करें। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से बचें।
-नियमित व्यायाम करें एक्सरसाइज से लिवर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है और फैटी लिवर की समस्या से राहत मिलती है।
लिवर के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ आदतों को अपनाना जरूरी है। यह न केवल लिवर की कार्यक्षमता को बनाए रखता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।