आमजन को टैक्स स्लैब तो छोटे उद्योगों को GST में राहत की उम्मीद, कोरोना सेस की भी चर्चा

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भोपाल: साल 2020 में कोरोना महामारी ने न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी अपनी चपेट में ले लिया अब दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जीतने की ओर अग्रसर है इस वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीन भी आ चुकी हैं साथ ही देशों की अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जिसकी अर्थव्यस्था में सबसे तेजी से सुधार हो रहा है |

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि साल 2021-22 में भारत की अर्थव्यस्था की रफ्तार 11.5% वार्षिक रहेगी आईएमएफ के अनुसार दुनिया में भारत एक मात्र ऐसा देश होगा जिसकी जीडीपी ग्रोथ डबल डिजिट में होगी इस बीच 1 फरवरी को भारत वित्त वर्ष 2021-22 का बजट भी पेश करने जा रहा है मोदी सरकार सुधार की राह पर चल पड़ी अर्थव्यवस्था को अपने इस बजट के जरिए और रफ्तार देने की पूरी कोशिश करेगी|

पूरे देश के साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आम लोगों और व्यापारियों को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं. बजट से पूर्व कई तरह की चर्चाएं भी हैं इसमें सबसे ज्यादा चर्चा कोविड सेस को लेकर है वहीं कमाई करने वाले लोगों को टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद है व्यापारियों को जीएसटी में राहत की उम्मीद सरकार से है देश में किसान आंदोलन चल रहा है ऐसे में सरकार जरूर कुछ ऐसी घोषणाएं करेगी जिसका सीधा लाभ कृषि क्षेत्र को मिले आइए जानते हैं सरकार इस बजट में किन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर सकती है |

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है​ ​कि मोदी सरकार को बजट में ऐसी चीजों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए जिससे रोजगार सृजन हो सके कोरोनाकाल में बेरोजगार हुए लोगों को किन-किन स्थानों पर रोजगार मिल सकता है, उस पर ध्यान देना चाहिए इसके लिए सरकार को कंस्ट्रक्शन, हाउसिंग प्रोजेक्ट्स, रियर स्टेट क्षेत्र इत्यादि को रियायत देना होगा ये क्षेत्र गैर संगठित क्षेत्र में काफी रोजगार उपलब्ध कराते हैं. साथ ही सरकार को ग्रामीण योजनाओं और मनरेगा बजट को भी बढ़ाने पर जोर देना चाहिए |

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