आज जब मेगा बजट और हाईटेक वीएफएक्स के दौर में Ramayana जैसी फिल्म करीब 4000 करोड़ रुपये में बन रही है, वहीं 39 साल पहले बनी Ramayan एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सीमित संसाधनों के बावजूद इस सीरियल ने जो प्रभाव छोड़ा, वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
साल 1987 में Ramanand Sagar द्वारा बनाई गई ‘रामायण’ उस समय की सबसे महंगी टीवी सीरीज मानी जाती थी, लेकिन आज के हिसाब से इसका बजट बेहद कम था। बताया जाता है कि पूरी सीरीज करीब 7 से 9 करोड़ रुपये में तैयार हुई थी, जबकि हर एपिसोड पर लगभग 9 लाख रुपये खर्च किए जाते थे। कुल 78 एपिसोड की इस सीरीज ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
इस सीरियल की खास बात सिर्फ इसकी कहानी नहीं, बल्कि इसके अनोखे इफेक्ट्स भी थे। उस दौर में कंप्यूटर ग्राफिक्स या वीएफएक्स जैसी तकनीक मौजूद नहीं थी, इसलिए टीम ने साधारण चीजों से अद्भुत दृश्य तैयार किए। धुंध और कोहरे के सीन के लिए अगरबत्ती का धुआं इस्तेमाल किया जाता था, जिससे सुबह या रहस्यमयी माहौल बनाया जाता था।
बादलों और आसमान के दृश्यों के लिए रुई का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे इस तरह सजाया जाता था कि वह असली बादलों जैसा लगे। वहीं, ग्लास पेंटिंग तकनीक से बैकग्राउंड तैयार किए जाते थे, जिनकी मदद से स्वर्ग, जंगल और दूसरी दुनिया के दृश्य बेहद खूबसूरत ढंग से दिखाए जाते थे। इसके अलावा मिनिएचर मॉडल बनाकर पहाड़, किले और युद्ध के मैदान तैयार किए जाते थे।
युद्ध के दृश्यों को प्रभावी बनाने के लिए उस समय की SEG 2000 मशीन का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, किसी किरदार की मृत्यु या घायल होने के दृश्य के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से नकली बॉडी पार्ट्स बनाए जाते थे, जो स्क्रीन पर बेहद वास्तविक लगते थे।
सीरियल में Arun Govil ने भगवान राम और Deepika Chikhalia ने माता सीता का किरदार निभाया था, जिन्हें आज भी लोग श्रद्धा से याद करते हैं।
सीमित संसाधनों, साधारण तकनीक और जुगाड़ से बनी ‘रामायण’ यह साबित करती है कि सच्ची कला महंगे बजट की मोहताज नहीं होती। यही वजह है कि दशकों बाद भी यह सीरियल दर्शकों के दिलों में उसी श्रद्धा और लोकप्रियता के साथ बसा हुआ है।


