सीहोर। दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जो हमें ईश्वर की तरफ से नहीं मिलते बल्कि उन्हें हम खुद अपनी जिंदगी के लिए चुनते हैं, उन्हीं में से एक रिश्ता है दोस्ती का। ये दोस्त हमारी खुशी में साथ नाचते हैं, तो गम में हाथ थामे रहते हैं। ऐसे ही दोस्ती की मिसाल पेश की हैं बाल किशन शाक्य ने, जिन्होंने न सिर्फअपने दोस्त को कांधा दिया बल्कि मुखाग्नि भी दी।
अटल आडवाणी के नाम से मशहूर कोली मोहल्ला गंज सीहोर के निवासी दो दोस्त बालकिशन शाक्य एवं देवेंद्र बंशकार बचपन से एक साथ पले बढ़े दोनों में इतनी गहरी दोस्ती थी कि दोनों दोस्तों ने 25 वर्ष पहले एक लिखित एग्रीमेंट आपस में किया था कि दोनों दोस्तों में से पहले जिसका भी निधन होगा तो जीवित दोस्त अपने दोस्त को मुखाग्नि देगा। दोनों की दोस्ती इतनी परवान चढ़ी की दूर-दूर तक इनकी दोस्ती फेमस हो गई थी। इन दोनों दोस्तों में से देवेन्द्र बंशकार का बीमारी के चलते निधन हो गया। एग्रीमेंट की बात दोनों दोस्तों के परिवार वालों को भी मालूम थी।
जब दोस्त ने दोस्त को मुखाग्रि दी तो मुक्तिधाम में यह दृश्य देखकर उपस्थित लोग भावुक हो गए। अपने दोस्त की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए देवेंद्र वंशकार के परिवारजनों ने मुखाग्नि देने की बालकिशन को सहमति दी। इस प्रकार अपने दोस्त देवेंद्र बंशकार को देवेंद्र की छोटी बहन कुमारी कीर्ति वंशकार के साथ बालकिशन शाक्य ने मुखाग्नि देकर अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। सीहोर गल्ला मंडी मुक्तिधाम में यह दृश्य देखकर उपस्थित लोग भावुक हो गए। अपने दोस्त देवेंद्र को बालकिशन शाक्य ने रुदन कंठ नमन आंखों से अंतिम श्रद्धांजलि दी। बाल किशन शाक्य अखिल भारतीय कोली समाज सीहोर के जिला अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने आज के समय में मानव जाति के लिए बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है।
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