الرئيسيةप्रदेशसरकारी अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी,अब प्राइवेट डॉक्टर करेंगे इलाज

सरकारी अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी,अब प्राइवेट डॉक्टर करेंगे इलाज

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी के कारण अब प्राइवेट डॉक्टरों से अनुबंध करने का फैसला किया है। यह निर्णय सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करने के लिए लिया गया है। स्वास्थ्य आयुक्त ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद लिया गया फैसला
एक महीने पहले ही हाईकोर्ट ने हेल्थ कमिश्नर को एमबीबीएस डॉक्टरों की पोस्टिंग में डेढ़ साल की देरी को लेकर फटकार लगाई थी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जहां मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों को समय पर नियुक्ति नहीं मिल पा रही है, वहीं सरकार डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए निजी डॉक्टरों पर निर्भर हो रही है।

आयुष्मान कार्ड धारकों को प्राथमिकता
सरकार ने इस पहल के तहत शुरुआत में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। अनुबंध रोगी कल्याण समिति के माध्यम से किया जाएगा और यह एक साल के लिए मान्य होगा। यदि सेवाएं संतोषजनक होती हैं, तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए निजी डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी। शुरुआत में इसका लाभ आयुष्मान योजना के तहत आने वाले मरीजों को मिलेगा, लेकिन बाद में इसे अन्य मरीजों के लिए भी लागू किया जा सकता है।

प्राइवेट डॉक्टरों को मिलेगा निश्चित भुगतान
सेवाएं देने वाले प्राइवेट डॉक्टरों को मासिक आधार पर भुगतान किया जाएगा। सर्जिकल विशेषज्ञों को आयुष्मान योजना के पैकेज का 21.6% और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों को 10.8% भुगतान किया जाएगा। इसके तहत डॉक्टर सर्जरी से पहले और बाद में मरीजों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी लेंगे।

क्या प्राइवेट डॉक्टर लेंगे रुचि?
आयुष्मान योजना में निर्धारित पैकेज के तहत सर्जरी का भुगतान अधिकतर मामलों में मामूली है। उदाहरण के लिए, गठान की सर्जरी का पैकेज 2,000 रुपये और नसबंदी का पैकेज भी 2,000 रुपये है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि प्राइवेट डॉक्टर इस अनुबंध में कितनी रुचि दिखाते हैं।

समितियां करेंगी अनुबंध प्रक्रिया की निगरानी
जिला अस्पताल और अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए अलग-अलग समितियां गठित की जाएंगी। जिला अस्पतालों के लिए सिविल सर्जन और अन्य अस्पतालों के लिए सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) की अध्यक्षता में अनुबंध प्रक्रिया संपन्न होगी।

सरकार के इस कदम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को आंशिक रूप से पूरा करने की उम्मीद है, लेकिन यह योजना कितनी कारगर होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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