भोपाल।सुप्रीम कोर्ट के दो सप्ताह में पंचायत और नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण करवाकर चुनाव घोषित करने के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार भी हरकत में आ गई है। पंचायतों में ओबीसी आरक्षण करवाए जाने के एक दिन के निर्णय के बाद शुक्रवार को नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण के साथ एससी और एसटी आरक्षण 50 फीसदी की सीमा कराए जाने के कलेक्टरों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।
प्रदेश में यह पहला मौका है जब दो सप्ताह के भीतर आयोग को पंचायत और नगरीय निकाय के चुनावों की घोषणा करना है। ओबीसी आरक्षण कराए जाने की समय सीमा 25 मई है। इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग कलेक्टरों के साथ कोई वीसी नहीं करेगा, साथ ही मुख्यमंत्री भी सामूहिक रूप से कलेक्टरों से सामूहिक चर्चा नहीं करेंगे। कलेक्टरों को अगले पांच दिनों के लिए ओबीसी समेत आरक्षण रिपोर्ट तैयार किए जाने के लिए फ्री हैंड कर दिया गया है। नगरीय निकाय में आरक्षण को लेकर विभाग से भेजे गए निर्देश में स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी निकाय में 35 प्रतिशत से अधिक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। उदाहरण के लिए किसी निकाय में एससी-एसटी मिलाकर 10 प्रतिशत होता है तो वहां अधिकतम 50 प्रतिशत आरक्षण की बाध्यता के तहत 40 प्रतिशत तक ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया जाए।
राज्य सरकार चुनावी नफा-नुकसान को देखते हुए अगले 10 दिनों में 15 हजार करोड़ रुपए के काम शुरू करेगी, जिनमें नगरीय निकाय और पंचायतों में रोजाना 1500 करोड़ के कामों की शुरुआत होगी। आयोग के सामने दूसरी बड़ी चुनौती बैलेट पेपर से पंचायतों के चुनाव कराए जाने की है। राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने सफेद, नीले, पीले एवं गुलाबी कागज की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। पंचायत चुनावों में 3 करोड़ 80 लाख मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे। नगरीय निकायों के चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम में उपयोग होने वाली सामग्री दो चरणों में होने वाली वोटिंग के लिए 8 प्रकार के लिफाफों के प्रिटिंग की व्यवस्था करने के बारे में कहा है।
1. इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 27 लाख आवास बनाए जाना है, जिनमें से 45 हजार बनाए जा चुके हैं। 1 लाख आवासों के काम आचार संहिता लागू होने के पहले शुरू हो जाएंगे।
2. अन्य बड़े वर्गों में 82 लाख किसानों के खाते में मुख्यमंत्री सम्मान निधि के 4-4 हजार रुपए दिए जाने का काम शुरू होगा, इसके तहत 1706 करोड़ रुपए किसानों के खाते में डाले जाएंगे।
3. नगरोदय अभियान के तहत 22 हजार करोड़ रुपए के काम 356 नगरीय निकायों में किए जाने को स्वीकृति दी गई है। यानी ये सभी काम आचार संहिता के दौरान भी चलते रहेंगे।
4. प्रदेश में 1 जून से आचार संहिता लग सकती है। इसके बाद राज्य सरकार कोई भी नई घोषणाएं नहीं कर सकेगी। लेकिन प्रदेश में जो काम शुरू हो गए हैं, उन पर रोक नहीं रहेगी।
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