मोहन कैबिनेट की अहम बैठक में हुए यह बड़े फैसले

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में 11 बजे मंत्रालय में अहम कैबिनेट बैठक सम्पन्न हुई । इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए ।इसके अलावा मंत्रालय में हुई बैठक में सीएम मोहन यादव के जर्मनी और लंदन दौरे के दौरान मध्य प्रदेश में निवेश के लिए मिले 78 हजार करोड़ को लेकर चर्चा की गई। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना के ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ के बाद अब उसके ‘मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर की सहमति बन गई है। अब योजना की प्रशासकीय स्वीकृति के लिए 15 दिन में मंत्रिपरिषद के सामने समरी (संक्षेपिका) प्रस्तुत की जाएगी।

 

 

डॉ यादव ने मंत्रिमंडल की बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 75 हजार करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से प्रदेश के 11 जिले गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और मुरैना के 2094 गांवों में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। साथ ही पेयजल एवं औद्योगिक आपूर्ति के लिए जल भी उपलब्ध होगा। योजना में मध्यप्रदेश में 21 बांध एवं बैराज बनाए जाएंगे। योजना अंतर्गत प्रदेश में कराए जाने कार्यों की लागत लगभग 36 हजार 800 करोड़ रुपए है।

 

पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के लाखों किसानों का जीवन बदलेगा। उन्हें न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, बल्कि संबंधित क्षेत्र में पर्यटन और उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की 17 परियोजनाएं एवं राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल हैं। परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है। परियोजना के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश के कुल लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर नवीन क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल व उद्योगों के लिए लगभग 172 मिलियन घन मीटर जल का प्रावधान किया गया है। परियोजना से लगभग 40 लाख परिवार लाभांवित होंगे।

 

संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना में मध्यप्रदेश से शुरू होने वाली पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा एवं सहायक नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स में 4 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा एवं धनवाड़ी), 2 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ), कुम्भराज कॉम्पलेक्स में 2 बांध (कुम्भराज-1 एवं कुम्भराज-2) तथा रणजीत सागर, लखुंदर बैराज एवं ऊपरी चम्बल कछार में 7 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेडी, चितावद तथा सीकरी सुल्तानपुरा) शामिल हैं।

 

इसके अलावा गांधी सागर बांध की अपस्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह राज्य शासन की एक बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। केन्द्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का काम अगले 5 साल में पूरा हो जाएगा।

 

परियोजना अंतर्गत कुल 21 बांध, बैराज एवं बैलेंसिंग रिजर्वायर आदि का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही परियोजना में मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मध्य मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर (सीआरएमसी) एवं मध्य प्रदेश क्षेत्र में सीआरएमसी सिस्टम को अंतिम छोर तक नवीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु प्रावधान रखा गया है, जिससे मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिण्ड जिलों को सिंचाई एवं पेयजल हेतु आवंटित जल प्राप्त हो सकेगा।

 

जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के मंत्री, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री और दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव एवं सचिव की उपस्थिति में 28 जनवरी 2024 को परियोजना की डीपीआर तैयार करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स की 6 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है। शेष परियोजनाओं की डीपीआर विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन है।

 

संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का भारत सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट समझौता अनुबंध (MoA) को मध्य प्रदेश शासन द्वारा संशोधन उपरांत भारत सरकार को 25 अक्टूबर 2024 को प्रेषित कर अनुरोध किया गया था कि मध्यप्रदेश के कार्यों को एमओए में समावेश कर आखिरी रूप दिए ड्राफ्ट समझौता अनुबंध (एमओए) को मध्य प्रदेश शासन को भेजें, जिससे अंतिम ड्राफ्ट (एमओए) पर शासन से अनुमोदन प्राप्त किया जा सके।

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