Ujjain News: उज्जैन में इस वर्ष श्रावण मास में भगवान श्री महाकालेश्वर की शोभायात्राएं पहले से कहीं अधिक भव्य और विविध रूपों में देखने को मिलेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इच्छा अनुसार हर वर्ष की तरह इस बार भी नई थीमों के साथ शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। 14 जुलाई से शुरू होकर 18 अगस्त तक कुल छह शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। हर शोभायात्रा की थीम और स्वरूप अलग होगा जिससे हर बार श्रद्धालुओं को नया आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा।
हर शोभायात्रा में भगवान श्री महाकालेश्वर अलग-अलग स्वरूपों में विराजेंगे। पहले दिन पालकी में श्री मनमोहन, फिर हाथी पर विराजमान होकर निकलेंगे। जैसे-जैसे शोभायात्राएं आगे बढ़ेंगी, भगवान शिव तांडव गरुड़ रथ पर, श्री उमामहेश नंदी रथ पर और होलकर राज्य की झांकी भी देखने को मिलेगी। अंतिम और सबसे भव्य शाही शोभायात्रा में सप्तधन मुखारविंद की झांकी भी विशेष आकर्षण होगी। इस आयोजन में श्रद्धालु एक साथ कई धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवियों को साकार होते देख पाएंगे।

हर शोभायात्रा को विशेष बनाने के लिए देश के विभिन्न भागों से लोकनृत्य समूह आमंत्रित किए गए हैं। दूसरे दिन की शोभायात्रा में मध्यप्रदेश का मटकी नृत्य, राजस्थान का गणगौर, असम का बिहू, गुजरात का भवई और कर्नाटक का पुलियाट्टम नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। तीसरी शोभायात्रा में पुलिस, सेना और होमगार्ड के बैंड दलों की प्रस्तुतियां होंगी जो माहौल को उल्लासपूर्ण बनाएंगी। इस आयोजन से सांस्कृतिक विविधता की झलक भी मिलेगी।
पर्यटन थीम पर आधारित झांकियां करेंगी प्रदेश का गौरव प्रदर्शित
चौथी शोभायात्रा पर्यटन थीम पर आधारित होगी जिसमें मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों की झांकियां शामिल होंगी। मंडू, संची, खजुराहो, महेश्वर, भीमबेटका, ग्वालियर किला, उदयगिरि गुफाएं और विदिशा की झांकियां न सिर्फ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार करेंगी बल्कि दर्शकों को भी गौरव की अनुभूति कराएंगी। इन झांकियों को देखकर पर्यटक और श्रद्धालु भी प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रति आकर्षित होंगे।
श्रावण मास में हर शनिवार को त्रिवेणी कला संग्रहालय के सभागार में संगीतमय महोत्सव का आयोजन होगा। वहीं 13 जुलाई से 16 अगस्त तक श्री महाकाल महालोक परिसर में रोजाना ‘श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या’ का आयोजन होगा। इसमें देशभर से आए 47 कलाकार दल भक्ति गीत, शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य और नाटक की प्रस्तुतियां देंगे। यह आयोजन श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक संगीतमय और आध्यात्मिक अनुभव बन जाएगा।


