10 दिन का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर विवादित स्थल पर बनी मस्जिद को नहीं हटाया गया, तो वे खुद 3,000 वर्ग फीट जमीन पर बनी मस्जिद को तोड़ देंगे। प्रदर्शनकारी बार-बार प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे थे, और उनका आरोप था कि प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
मस्जिद के निर्माण पर सवाल
विश्व हिंदू परिषद के विभाग संयोजक सुमित सिंह ठाकुर ने दावा किया कि मस्जिद गायत्री मंदिर की जमीन पर बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह काशी, अयोध्या और मथुरा में अवैध कब्जे किए गए थे, उसी तरह जबलपुर में भी ऐसा हो रहा है। वीएचपी का आरोप है कि इस इलाके में रोहिंग्या मुसलमानों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं, जिनका आधार कार्ड लोकल का नहीं है, और इससे अपराध दर में वृद्धि हो रही है।
मस्जिद निर्माण पर पहले से स्टे
वीएचपी का कहना है कि मस्जिद के निर्माण पर पहले ही स्टे लगाया जा चुका है। पहली बार 12 जून 2021 को कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिया गया था, जिसमें मस्जिद निर्माण को अवैध बताया गया था। इसके बाद 27 जुलाई 2021 को तत्कालीन एसडीएम ने मस्जिद निर्माण पर रोक लगा दी थी। हालांकि, संगठन का आरोप है कि रोक के बावजूद बाहरी लोग यहां आते रहते हैं और ठहरते हैं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन को कई बार रोहिंग्या मुसलमानों की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पुलिस का बयान
एएसपी प्रदीप शेनडे ने कहा कि हिंदू संगठनों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है और मस्जिद के विवादित होने का दावा किया है। एसडीएम ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। फिलहाल, पुलिस स्थिति पर नजर रख रही है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कड़ी सुरक्षा तैनात की गई है।
जबलपुर के मड़ई क्षेत्र में मस्जिद को लेकर चल रहे इस विवाद ने सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता मस्जिद को अवैध बताते हुए इसे गिराने की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। इस मामले का हल निकालने के लिए प्रशासन को जल्द ही कोई ठोस कदम उठाना होगा, ताकि शहर में शांति और सद्भाव कायम रहे।
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