MP News: NEET घोटाले ने ली एक और जान, सुसाइड नोट ने झकझोरा देश

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By Input Published On: June 2, 2026
MP News: NEET घोटाले ने ली एक और जान, सुसाइड नोट ने झकझोरा देश

MP News: देशभर में NEET UG 2026 पेपर लीक को लेकर पहले से ही लाखों छात्र और अभिभावक परेशान हैं। इसी बीच मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने का सपना देख रही छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी और इस बार अपने प्रदर्शन को लेकर काफी उत्साहित थी। परिवार के अनुसार परीक्षा देने के बाद उसे पूरा विश्वास था कि वह अच्छे अंकों के साथ सफल होगी। लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई। इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुसाइड नोट में छलका दर्द

आकांक्षा ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी। उसने लिखा कि उसके अंदर दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है। छात्रा ने अपने नोट में कहा कि पहली परीक्षा में उसके अच्छे अंक आने की उम्मीद थी लेकिन अब दोबारा परीक्षा में वही प्रदर्शन कर पाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। यह शब्द केवल एक छात्रा की पीड़ा नहीं बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों की भावनाओं को भी दर्शाते हैं जो परीक्षा में अनियमितताओं से प्रभावित हुए हैं। परिवार का कहना है कि पेपर लीक की खबर सुनने के बाद वह लगातार उदास रहने लगी थी। उसने धीरे-धीरे बातचीत कम कर दी और खाना-पीना भी छोड़ दिया था।

बेटी की पढ़ाई के लिए पिता ने उठाया था बड़ा संघर्ष

आकांक्षा का परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण है। उसके पिता कृष्ण कुमार चौबे किसान हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए नागपुर में कुक का काम भी करते थे। परिजनों के अनुसार बेटी को डॉक्टर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लगभग 15 लाख रुपये का कर्ज लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि आकांक्षा की मेहनत रंग लाएगी और उनका संघर्ष सफल होगा। आकांक्षा के दादा जगदीश चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा के बाद वह बेहद खुश थी और दावा कर रही थी कि उसे 650 से अधिक अंक मिलेंगे। लेकिन पेपर लीक की खबर ने उसकी उम्मीदों को पूरी तरह तोड़ दिया। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि उन लाखों परिवारों की चिंता का प्रतीक बन गई है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं।

घटना के बाद गरमाई राजनीति और उठे सवाल

आकांक्षा की मौत के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने परिवार से बात कर उन्हें सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिया। वहीं इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है क्योंकि इनसे करोड़ों युवाओं का भविष्य जुड़ा होता है। छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है। आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में होने वाली छोटी सी चूक भी किसी युवा के सपनों और जीवन पर कितना बड़ा असर डाल सकती है। यह घटना आने वाले समय में परीक्षा सुधारों और छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चर्चा का आधार बन सकती है।