कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi ने अपने भाई और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह तय करना कि कौन “सच्चा भारतीय” है, न्यायालय का अधिकार क्षेत्र नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी का कर्तव्य है कि वह सरकार से सवाल पूछें और जनता की आवाज को संसद में उठाएं।
राहुल गांधी के बयान को गलत समझा गया: प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी ने कभी भी सेना के खिलाफ कुछ नहीं कहा और उनके मन में सेना के लिए गहरा सम्मान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। यह टिप्पणी तब आई जब सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए कथित विवादास्पद बयान पर सवाल उठाए थे और कहा था कि “अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बातें नहीं कहेंगे।”
They do not decide who a true Indian is. It's the job of the Opposition Leader, and it's his duty to ask questions and challenge the government.
My brother would never say anything against the Army; he holds the Army in the highest respect. So, it's a misinterpretation.
— Congress (@INCIndia) August 5, 2025
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और राहुल गांधी पर मामला
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्होंने कैसे दावा किया कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया है। अदालत ने पूछा कि क्या उनके पास कोई विश्वसनीय प्रमाण है? हालांकि, अदालत ने लखनऊ कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक भी लगा दी है।
विपक्ष का कर्तव्य है सवाल उठाना: कांग्रेस का पक्ष
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं का कर्तव्य है कि वे मुद्दे उठाएं। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया में प्रकाशित तथ्यों को भी विपक्ष नहीं कह सकता, तो लोकतंत्र में विपक्ष का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। सिंघवी ने यह भी माना कि राहुल का बयान थोड़ा बेहतर तरीके से कहा जा सकता था, लेकिन इस मामले को लेकर उन पर कार्रवाई करना केवल एक राजनीतिक प्रतिशोध है।
लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए: प्रियंका की अपील
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल पूछने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका से अपील की कि नेताओं को देशद्रोही या “सच्चा भारतीय नहीं” कहने से पहले उनके इरादों और संदर्भ को समझा जाए। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के लिए जरूरी है कि विपक्ष को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए।


