Axiom-4 Mission: 41 साल बाद फिर चमका तिरंगा अंतरिक्ष में, शुभांशु का पहला संदेश सुनकर भावुक हो जाएंगे

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By Sharma Published On: June 27, 2025
Axiom-4 Mission: 41 साल बाद फिर चमका तिरंगा अंतरिक्ष में, शुभांशु का पहला संदेश सुनकर भावुक हो जाएंगे

Axiom-4 Mission: भारत के लिए 41 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद एक ऐतिहासिक क्षण आया है। भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन कमांडर शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। 1984 में राकेश शर्मा के बाद किसी भारतीय ने अब जाकर दोबारा यह कीर्तिमान रचा है। शुभांशु शुक्ला ने 28 घंटे की लंबी यात्रा के बाद 25 जून को Axiom-4 मिशन के तहत ISS पर कदम रखा और वे अंतरिक्ष में जाने वाले दुनिया के 634वें अंतरिक्ष यात्री बन गए। उनके चेहरे पर गर्व और हर्ष साफ झलक रहा था जब उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।”

ISS पर पहुंचते ही शुभांशु ने भारतवासियों को पहला संदेश भेजा। उन्होंने कहा, “आप सभी के आशीर्वाद और प्यार से मैं सुरक्षित अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच गया हूं। यहां खड़े रहना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं। सिर में थोड़ा भारीपन है, लेकिन ये सब सामान्य हैं। अगले 14 दिन बेहद रोमांचक होंगे।” उनके कंधे पर तिरंगा लहराते देख हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। शुभांशु ने कहा कि जब मैं तिरंगे के साथ चलता हूं, तो मुझे महसूस होता है कि पूरा देश मेरे साथ है।

Axiom-4 Mission: 41 साल बाद फिर चमका तिरंगा अंतरिक्ष में, शुभांशु का पहला संदेश सुनकर भावुक हो जाएंगे

14 दिन, 60 वैज्ञानिक प्रयोग और अंतरिक्ष में भारतीय विज्ञान

Axiom-4 मिशन के तहत शुभांशु शुक्ला 14 दिन तक ISS पर रहकर करीब 60 वैज्ञानिक प्रयोग करने जा रहे हैं। यह मिशन NASA, SpaceX और ISRO के संयुक्त सहयोग से संचालित हो रहा है। उनके साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी इस मिशन में शामिल हैं। इन प्रयोगों में मानव शरीर की प्रतिक्रिया, जैविक परिवर्तन, और माइक्रोग्रैविटी में तकनीकी प्रयोग शामिल हैं। शुभांशु ने कहा, “यह यात्रा विज्ञान और खोज की दिशा में एक नया कदम है। आने वाले दिन भारत के लिए गर्व से भरे होंगे।”

भारतीय वायुसेना से अंतरिक्ष तक का सफर

शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन कमांडर हैं और उनके पास 2000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। उनका अनुशासन, समर्पण और तकनीकी दक्षता ही उन्हें इस चुनौतीपूर्ण मिशन का हिस्सा बनने के योग्य बना पाई। अंतरिक्ष मिशन के लिए उनका चयन ISRO और NASA के कठोर परीक्षणों के बाद हुआ था। उन्होंने कहा, “मेरे कंधे पर तिरंगा है, लेकिन यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं, पूरे भारत की उम्मीदों का प्रतीक है।” उनका यह वक्तव्य हर भारतीय के दिल को छू गया।

1984 में राकेश शर्मा ने जब कहा था “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा”, तब पूरा भारत भावुक हो गया था। अब 41 साल बाद शुभांशु शुक्ला ने वही भावना दोहराई, लेकिन अपने अंदाज में – “मैं अकेला नहीं हूं, आप सभी मेरे साथ हैं।” यह पंक्ति एक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुकी है। भारत एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में आत्मविश्वास के साथ प्रवेश कर चुका है और यह कदम भविष्य के मानवयुक्त मिशनों की नींव रखता है।