Delhi News: 4000 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया! यमुना में डुबकी अब ख़तरे से खाली नहीं

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By Sharma Published On: July 19, 2025
Delhi News: 4000 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया! यमुना में डुबकी अब ख़तरे से खाली नहीं

Delhi News: दिल्ली में मानसून के कारण जहां एक ओर हवा की गुणवत्ता में थोड़ी राहत मिली है, वहीं यमुना नदी की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यमुना का जल स्तर पहले की तुलना में और ज़्यादा प्रदूषित हो चुका है। यह रिपोर्ट जुलाई महीने के लिए है, जिसमें साफ कहा गया है कि नदी में बैक्टीरिया की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है।

फीकल कोलिफॉर्म का स्तर 4000 गुना ज़्यादा

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक आंकड़ा फीकल कोलिफॉर्म (मल जनित बैक्टीरिया) का है। आईटीओ ब्रिज पर इसका स्तर 92,00,000 MPN/100 ml पाया गया है, जबकि सुरक्षित सीमा 2,500 MPN/100 ml मानी जाती है। यानी यह स्तर लगभग 4000 गुना अधिक है। यह दर्शाता है कि यमुना में गंदा और बिना उपचारित सीवेज बड़ी मात्रा में मिल रहा है। जुलाई में पल्ला से लेकर असगरपुर तक हर स्थान पर फीकल कोलिफॉर्म का स्तर खतरनाक रूप से अधिक है।

Delhi News: 4000 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया! यमुना में डुबकी अब ख़तरे से खाली नहीं

 जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) में भी वृद्धि

BOD का स्तर भी यमुना में लगातार बढ़ रहा है। पल्ला में यह 8 mg/l है जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की सीमा 3 mg/l से कम है। ITO और इसके आसपास के क्षेत्रों में BOD का स्तर 70 mg/l तक पहुंच गया है, जो गंभीर ऑर्गेनिक प्रदूषण को दर्शाता है। असगरपुर में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है (24 mg/l), फिर भी यह सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है।

जलीय जीवों के लिए भी संकट, ऑक्सीजन की कमी

यमुना नदी में घुलित ऑक्सीजन (DO) की मात्रा भी गिरावट पर है, जो मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए खतरे की घंटी है। DO का कम स्तर इस बात का संकेत है कि नदी में गंदगी और ऑर्गेनिक कचरे की अधिकता है, जिससे जलचरों का जीवन संकट में आ सकता है। ये आंकड़े यमुना के पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।

हर महीने दी जा रही है रिपोर्ट, पर समाधान नदारद

DPCC हर महीने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देश पर यमुना के आठ स्थानों से सैंपल लेकर रिपोर्ट तैयार करता है। लेकिन रिपोर्ट के बावजूद प्रदूषण पर रोक के लिए कोई ठोस कदम नज़र नहीं आ रहा। नदी में 22 से अधिक नालों का गंदा पानी सीधे गिरता है, जिससे यमुना की हालत लगातार बदतर होती जा रही है।