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खटिया पर SDM ऑफिस के बाहर युवक का अनशन, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित है युवक

रीवा (मध्यप्रदेश): रीवा जिले की त्योंथर तहसील के उसरगांव का 23 वर्षीय मनीष यादव एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, से पीड़ित हैं। उनका शरीर सूखकर कांटा हो चुका है, और बीमारी के कारण वे पिछले तीन दिनों से एसडीएम ऑफिस परिसर में आमरण अनशन पर बैठे हैं। मनीष का कहना है कि जब तक उन्हें इलाज का आश्वासन नहीं मिल जाता, वे अपना अनशन जारी रखेंगे। उनकी यह बीमारी इतनी गंभीर है कि इसका इलाज भारत में संभव नहीं है, और इसे ठीक करने के लिए विदेश भेजने की जरूरत है।

क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी?

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं और सिकुड़ने लगती हैं। इसके परिणामस्वरूप, मांसपेशियों का विकास रुक जाता है और रोगी को चलने-फिरने में भी कठिनाई होती है। इस बीमारी से मनीष के परिवार के 5 सदस्य पीड़ित हैं, जिसमें मनीष के दो भाई, एक बहन और उनके पिता शामिल हैं।

इलाज के लिए महंगी स्टेम सेल थैरेपी की जरूरत

मनीष और उनके परिवार के लिए स्टेम सेल थैरेपी के जरिए इलाज की संभावनाएं हैं, लेकिन यह प्रक्रिया बेहद महंगी है। एक इंजेक्शन की कीमत 1 लाख रुपये है, और हर मरीज को इलाज के लिए 20 इंजेक्शन लगने होते हैं। इसके साथ ही, जांच और अन्य चार्ज मिलाकर एक मरीज के इलाज का कुल खर्च करीब 30 लाख रुपये आता है।

मनीष यादव के संघर्ष की कहानी

मनीष के इलाज के लिए प्रयास 2006 से ही शुरू हो गए थे, जब उनके नाना उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल ले गए थे। वहां मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का पता चला, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज जारी नहीं रह सका। 2022 में सोशल मीडिया के जरिए उनकी कहानी राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा तक पहुंची, जिन्होंने मनीष और उनके भाइयों का इलाज कराने के प्रयास किए। लेकिन तब भी इलाज की शुरुआत नहीं हो सकी।

मनीष के अनुसार, 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनसे फोन पर बात की थी और वादा किया था कि सरकार उनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी, चाहे इलाज देश में हो या विदेश में। इस बातचीत के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी मनीष के इलाज का वादा किया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अनशन पर बैठा मनीष: ‘जीना चाहता हूं, वादा पूरा करो’

मनीष का कहना है कि पिछले साल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनकी जांच हुई थी, लेकिन इलाज की प्रक्रिया अब भी रुकी हुई है। मनीष ने कहा, “मैं जीना चाहता हूं, लेकिन इलाज के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हूं। सरकार ने वादा किया था, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। अगर सरकार मेरी मदद नहीं कर सकती, तो मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।”

मनीष का अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि मुख्यमंत्री या सरकार की तरफ से उन्हें इलाज का ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

त्योंथर एसडीएम एसके जैन ने मनीष से मुलाकात की है और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि मनीष और उनके परिवार की जांच रिपोर्ट विदेश भेजी गई थी, और इस मामले में सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहीं, रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा है कि पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी, और वे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

इलाज का खर्च और उम्मीद

मनीष के इलाज के लिए जर्मनी में इलाज की संभावना बताई गई है। एक मरीज के इलाज में करीब 30 लाख रुपये खर्च का अनुमान है, और परिवार के पांच सदस्यों का इलाज कराने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की जरूरत है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे इस भारी खर्च का वहन नहीं कर सकते।

मनीष यादव की कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों की आवाज है जो दुर्लभ बीमारियों से जूझते हैं और जिनके पास इलाज के लिए संसाधन नहीं हैं। मनीष के संघर्ष और उनकी बीमारी ने सरकारी वादों की हकीकत को भी सामने रखा है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन मनीष की मदद के लिए क्या कदम उठाते हैं, ताकि वे एक सामान्य जीवन जी सकें।

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