Nishikant Dubey को मराठी सांसदों ने घेरा, संसद की लॉबी तक पहुंचा हिंदी बनाम मराठी विवाद

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By Sharma Published On: July 24, 2025
Nishikant Dubey को मराठी सांसदों ने घेरा, संसद की लॉबी तक पहुंचा हिंदी बनाम मराठी विवाद

Nishikant Dubey: हिंदी बनाम मराठी विवाद अब सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी गर्माहट दिल्ली की संसद तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को संसद के लॉबी में घेर लिया और उनसे उनके बयान को लेकर जवाब मांगा। बताया गया कि दुबे ने पहले तो सफाई दी फिर ‘जय महाराष्ट्र’ बोलकर वहां से निकल गए। यह सब उस वक्त हुआ जब संसद के लॉबी में दोपहर करीब 12.30 से 1 बजे के बीच हंगामा सा माहौल बन गया।

क्या हुआ संसद में? जानिए चश्मदीद से

कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने बताया कि उन्होंने और उनकी सहयोगी सांसदों ने संसद भवन की लॉबी में निशिकांत दुबे को रोका और पूछा कि उन्होंने महाराष्ट्र के खिलाफ ऐसा आपत्तिजनक बयान क्यों दिया। दुबे जवाब देने की स्थिति में नहीं दिखे और महिलाओं की आक्रामकता देखकर घबरा गए। वर्षा के अनुसार, डर के मारे उन्होंने ‘नहीं नहीं… जय महाराष्ट्र’ कहकर वहां से निकलने में ही भलाई समझी।

Nishikant Dubey को मराठी सांसदों ने घेरा, संसद की लॉबी तक पहुंचा हिंदी बनाम मराठी विवाद

बयान पर क्यों मचा है बवाल?

दरअसल विवाद की जड़ में निशिकांत दुबे का वह बयान है जिसमें उन्होंने मराठी बनाम हिंदी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि “तुम लोग हमारे पैसे पर जीते हो। अगर दम है तो उर्दू तमिल और तेलुगु बोलने वालों को भी पीटो।” उनके इस बयान ने महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल ला दिया। खासकर बीएमसी चुनावों के समय ये टिप्पणी और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।

मुंबई में क्यों भड़की भाषा की आग?

मुंबई में पिछले कुछ दिनों में हिंदी भाषी लोगों के साथ मारपीट की कई घटनाएं सामने आई हैं। एमएनएस कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि वे हिंदी बोलने वालों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे को भड़काऊ ढंग से उठाया जिससे विवाद और गहरा गया। उन्होंने साफ कहा कि अगर दम है तो हिंदी बोलने वालों को बाहर निकालो और बिहार या यूपी आकर देखो क्या होता है।

राजनीति या क्षेत्रवाद: कौन है जिम्मेदार?

इस पूरे मामले में यह साफ झलक रहा है कि मराठी बनाम हिंदी विवाद को चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। वर्षा गायकवाड़ का दावा और दुबे की तीखी प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि दोनों ओर से बयानबाज़ी जानबूझकर की जा रही है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा किस तरह इस्तेमाल होता है ये देखना दिलचस्प होगा लेकिन इतना तय है कि क्षेत्रवाद की आग अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है।