उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस बयान को लेकर भागवत पर निशाना साधा है। अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या 2015 के बिहार चुनाव की तरह, जहाँ लालू प्रसाद यादव ने ऐसे ही एक बयान को भुनाकर बड़ी जीत हासिल की थी, वही रणनीति 2027 के यूपी चुनाव में भी दोहराई जाएगी।
आरक्षण पर सियासी वार-पलटवार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए गए बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है। मायावती और चंद्रशेखर आजाद दोनों ने इस मुद्दे को दलित और पिछड़े वर्ग के हितों से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर हमला बोला है।
क्या दोहराया जाएगा बिहार 2015 का इतिहास?
2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में, मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए गए एक बयान को लालू प्रसाद यादव ने प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। उस समय, उनके इस दांव ने महागठबंधन को बड़ी सफलता दिलाई थी। अब सवाल यह है कि क्या मायावती और चंद्रशेखर आजाद भी 2027 के यूपी चुनाव में इसी ‘लालू दांव’ को चलकर राजनीतिक लाभ उठा पाएंगे।