श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 167 रनों की शानदार पारी खेलकर देवदत्त पडिक्कल ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। दो साल से टीम में मौके का इंतजार कर रहे इस युवा बल्लेबाज ने बताया कि कैसे सही रणनीति और धैर्य ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
स्पष्ट रणनीति और फुटवर्क का कमाल
पडिक्कल ने अपनी सफलता का श्रेय स्पिनरों के खिलाफ बनाई गई स्पष्ट रणनीति और अपने बेहतरीन फुटवर्क को दिया है। उन्होंने कहा कि शतक जड़ने के बाद भी एकाग्रता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता थी, जिससे वह एक बड़ी पारी खेल सके।
कर्नाटक के दिग्गजों से मिली प्रेरणा
अपनी इस ऐतिहासिक पारी के पीछे उन्होंने कर्नाटक के दिग्गज खिलाड़ियों को प्रेरणा का स्रोत बताया है। इन दिग्गजों को बल्लेबाजी करते देख उन्होंने सीखा कि कैसे एक शतक को बड़ी और यादगार पारी में तब्दील किया जाता है।