नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और युवाओं ने भारतीय सेना में भर्ती फिर से शुरू करने के लिए जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि खाड़ी देशों में असुरक्षित रोजगार की तुलना में भारतीय सेना में ‘अग्निवीर’ बनना कहीं अधिक बेहतर विकल्प है।
अग्निपथ योजना से उपजा विवाद
साल 2022 में भारत द्वारा लागू की गई अग्निपथ योजना के बाद से गोरखा भर्ती प्रक्रिया में बदलाव आया है। चार साल की सेवा और सीमित नियमित भर्ती के प्रावधानों को लेकर नेपाल सरकार और पूर्व सैनिकों के बीच चिंताएं बनी हुई हैं, जिसके कारण यह मुद्दा फिर से चर्चा में है।
बालेन शाह पर बढ़ता दबाव
इस पूरे मामले को लेकर काठमांडू के मेयर बालेन शाह और नेपाल सरकार पर चौतरफा दबाव है। सरकार को अब भारत के साथ राजनयिक बातचीत और अपने युवाओं की रोजगार संबंधी मांगों के बीच एक संतुलित रास्ता निकालने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।