विदेश मंत्री एस जयशंकर का 23-24 अगस्त का मास्को दौरा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रपति पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से की जा रही है।
व्यापार और रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव
इस यात्रा के दौरान नॉर्दर्न सी रूट के माध्यम से व्यापार को सुगम बनाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे परिवहन लागत और समय में भारी कमी आएगी। साथ ही, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और रुपया-रूबल व्यापार को गति देने पर चर्चा प्राथमिकता रहेगी।
वैश्विक मंच पर भारत-रूस की भूमिका
ब्रिक्स जैसे मंचों के माध्यम से दोनों देश एक नए पावर सेंटर के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं। यह दौरा वैश्विक दबावों के बीच भारत के अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने के संकल्प को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।