छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हटपदमुर की महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने धान, पालक और बांस जैसी प्राकृतिक वस्तुओं से इको-फ्रेंडली राखियां तैयार की हैं, जिन्हें बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है।
पर्यावरण के अनुकूल राखियों की धूम
इन राखियों को पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्री से बनाया गया है, जो न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं बल्कि दिखने में भी बेहद आकर्षक हैं। स्थानीय स्तर पर इनकी भारी मांग ने इन महिलाओं को एक नया रोजगार और पहचान दिलाई है।
मिठाइयों के साथ बढ़ी कमाई
राखियों के साथ-साथ ये महिलाएं बूंदी और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयां भी तैयार कर रही हैं। इस दोहरी पहल से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है और वे सशक्त बन रही हैं।