अफगानिस्तान में तालिबान के साथ बिगड़ते संबंधों के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अपनी पुरानी रणनीति की ओर लौटता दिख रहा है। अमेरिकी थिंक टैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, काबुल पर अपना दबदबा खोने के बाद पाकिस्तान ने अपने हितों को साधने के लिए चुनिंदा आतंकवादी समूहों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
आतंकवाद का पुराना हथियार
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अपनी रणनीतिक विफलता को छिपाने और क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखने के लिए फिर से आतंकी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। यह कदम तालिबान और इस्लामाबाद के बीच बढ़ती कड़वाहट का सीधा परिणाम माना जा रहा है।
बदलते समीकरणों का असर
अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। अपनी पकड़ कमजोर होते देख पाकिस्तान अब फिर से उसी पुराने ढर्रे पर चल पड़ा है, जो लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय रहा है।