सीरिया में आईएसआईएस के खात्मे में कुर्द महिला लड़ाकों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया था। इन वीरांगनाओं ने ना केवल हथियार उठाए, बल्कि मोर्चे पर डटकर आतंकवाद को करारी शिकस्त दी। हालांकि, युद्ध खत्म होने के बाद अब ये महिलाएं हाशिए पर हैं और अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं।
अनिश्चित भविष्य का संकट
आईएसआईएस को हराने के बाद बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में इन महिला लड़ाकों की भूमिका सीमित हो गई है। आज ये महिलाएं न केवल उपेक्षा का शिकार हैं, बल्कि अपने भविष्य और आजीविका को लेकर गंभीर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हैं।
बलिदान के बाद उपेक्षा
आतंकवाद के खिलाफ सीरिया को सुरक्षित बनाने में इन महिलाओं का योगदान ऐतिहासिक रहा है। लेकिन युद्ध के बाद मिले इस सन्नाटे ने उनके संघर्ष को एक नया और कठिन मोड़ दे दिया है, जहां उन्हें अपने अधिकारों के लिए दोबारा लड़ना पड़ रहा है।