मुरैना के गिरवर सिंह तोमर ने 26 साल के लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद अपनी CRPF की वर्दी दोबारा हासिल कर ली है। बर्खास्तगी के बाद उन्होंने संन्यास लेकर मंदिर में जीवन बिताया, लेकिन अदालत में न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी। अगस्त 2026 में उनकी बहाली हुई और उन्होंने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में अपनी ड्यूटी फिर से शुरू कर दी है।
संत से हवलदार तक का सफर
वर्ष 1999 में सेवा से हटाए जाने के बाद गिरवर सिंह ने मंदिर में रहकर ‘गिरवर दास महाराज’ के रूप में दो दशक बिताए। इस दौरान वे पूरी तरह से अध्यात्म में लीन रहे, लेकिन अपनी नौकरी वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई को लगातार जारी रखा।
न्याय की जीत और वर्दी की वापसी
हाईकोर्ट में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार अगस्त 2025 में फैसला उनके पक्ष में आया। तमाम बाधाओं को पार करते हुए, उन्होंने कानूनी नोटिस के जरिए अपनी नियुक्ति सुनिश्चित की और अब वे फिर से देश सेवा के लिए वर्दी पहनकर तैनात हैं।