छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए पति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति अपनी पत्नी द्वारा दायर आय और संपत्ति के शपथ पत्र पर जिरह करने का हकदार है।
फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें पति को पत्नी से सवाल पूछने से रोक दिया गया था। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को समान अवसर देना अनिवार्य है।
पारदर्शिता पर जोर
न्यायालय के इस फैसले से अब भरण-पोषण के मामलों में सच्चाई सामने लाने के लिए पति को पत्नी की आर्थिक स्थिति पर क्रॉस एग्जामिनेशन करने की पूरी छूट होगी। यह निर्णय कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।