पाकिस्तान और चीन की दशकों पुरानी दोस्ती पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया है कि चीन ने बलूचिस्तान के खनन परियोजनाओं से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। यह घटनाक्रम शहबाज सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
चीन का मोहभंग
पाकिस्तान हमेशा से हर आर्थिक और रक्षा संकट के लिए चीन पर निर्भर रहा है। हालांकि, बलूचिस्तान में सुरक्षा चिंताओं और बिगड़ते हालातों के कारण अब चीन इन निवेशों से किनारा कर रहा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरियों को दर्शाता है।
शहबाज सरकार के लिए चुनौती
चीन का इन बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर होना पाकिस्तान की पहले से ही चरमराई अर्थव्यवस्था के लिए नई मुसीबत लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन का यह रुख जारी रहा, तो पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बचाना मुश्किल होगा।