ईरान के साथ जारी तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच ऊर्जा बाजार में भारत का कद तेजी से बढ़ा है। पिछले एक साल में भारत ने यूरोप के लिए डीजल की आपूर्ति करने वाले एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिससे वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता आई है।
यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा में भारत
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व में जारी संघर्षों के कारण यूरोप को ऊर्जा की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने अपनी रिफाइनिंग क्षमताओं का लाभ उठाते हुए यूरोपीय देशों की मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वैश्विक बाजार में बढ़ता दबदबा
भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों के एक बड़े निर्यातक के रूप में उभरा है। इस बदलाव ने वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर भारत की रणनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत कर दिया है।