छत्तीसगढ़ में तीजा का त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य की समृद्ध पाक कला को भी दर्शाता है। इस विशेष अवसर पर ‘खुरमी’ जैसे पारंपरिक पकवान बनाने की पुरानी परंपरा है, जो त्योहार के आनंद को कई गुना बढ़ा देते हैं।
सांस्कृतिक विरासत का स्वाद
आधुनिक दौर में जब खानपान की आदतें बदल रही हैं, खुरमी जैसे व्यंजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को जीवित रखने का कार्य करते हैं। यह पकवान न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई और मिठास से परिचित कराने का एक बेहतरीन माध्यम भी है।
कैसे बनाएं खास खुरमी
खुरमी तैयार करने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, गुड़ का पाक और मोयन का उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों को गूंथकर छोटी लोइयां बनाई जाती हैं और फिर इन्हें सुनहरा होने तक धीमी आंच पर तला जाता है, जिससे यह बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम बनी रहती हैं।