यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के प्रमुख सैन्य और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इस स्थिति ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का समझौते’ की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समझौते का भविष्य और सुरक्षा चुनौतियां
हूतियों के लगातार हमलों के बाद अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि क्या इस रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्की को सऊदी अरब की मदद के लिए सीधे तौर पर हस्तक्षेप करना होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अब अपनी पहली बड़ी अग्निपरीक्षा के दौर से गुजर रहा है।
ख्वाजा आसिफ का रुख और कूटनीतिक दबाव
इस पूरे मामले पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयानों ने हलचल बढ़ा दी है। इस्लामाबाद पर अब कूटनीतिक दबाव है कि वह इस सैन्य गठबंधन के तहत अपनी भूमिका स्पष्ट करे, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सीधे तौर पर इन देशों के आपसी संबंधों पर पड़ सकता है।