Parliament Monsoon Session : पीएम मोदी की मौजूदगी पर अड़ा विपक्ष! जानिए क्यों गरमाया मानसून सत्र

Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष ने साफ तौर पर कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद संसद में आकर “ऑपरेशन सिंदूर” और पहलगाम आतंकी हमले जैसे मुद्दों पर जवाब नहीं देते, तब तक बहस अधूरी मानी जाएगी। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सदन में जमकर नारेबाजी की और प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई।

कांग्रेस ने उठाए 9 बड़े सवाल

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक सूची जारी की, जिसमें सरकार से जवाब मांगे गए मुद्दों को गिनाया गया। इनमें पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप का सीजफायर पर बयान, बिहार में वोट चोरी का मामला (SIR), विदेश नीति, सीमांकन (delimitation), अहमदाबाद प्लेन क्रैश, मणिपुर में हिंसा और दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार शामिल हैं। कांग्रेस ने कहा कि इन विषयों पर चर्चा तभी सार्थक होगी जब प्रधानमंत्री स्वयं जवाब दें।

राहुल, प्रियंका और खरगे की तीखी टिप्पणी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा, “अगर सरकार के मंत्री बोल सकते हैं, तो हमें भी मौका मिलना चाहिए।” प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने भी संसद में यह मांग दोहराई कि प्रधानमंत्री खुद इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करें। विपक्ष का मानना है कि जब शीर्ष नेतृत्व जवाब देगा, तभी जिम्मेदारी तय होगी।

बीजेपी का पलटवार: विपक्ष फैला रहा झूठ

बीजेपी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर देश में भ्रम फैला रहा है। बीजेपी प्रवक्ता केके शर्मा ने कांग्रेस पर “झूठी कहानी गढ़ने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल हंगामे के जरिये राजनीतिक लाभ लेना चाहता है।

सरकार ने जताई चर्चा की तत्परता, विपक्ष रहा अडिग

राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार सभी रक्षा और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। बावजूद इसके विपक्षी दलों ने चर्चा शुरू होने से पहले ही वॉकआउट कर दिया और बार-बार हंगामा किया। सत्र के पहले दिन ही लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, जिससे जनता को कोई सकारात्मक संदेश नहीं मिला।

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