MP News: भोपाल में खेतों की जगह कॉलोनियों ने उगाई अवैध फसल, प्रशासन की चिंता बढ़ी

Author Picture
By Input Published On: March 23, 2026
MP News: भोपाल में खेतों की जगह कॉलोनियों ने उगाई अवैध फसल, प्रशासन की चिंता बढ़ी

MP News: भोपाल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी के कई खेतों की फसल गायब हो गई है और उनकी जगह कॉलोनियों ने ले ली है। बीते एक साल में जिले की हजारों खसरेवार कृषि भूमि पर खेती की बजाय सीमेंट और कांक्रीट के मकान और दुकानें बन गई हैं। जिला प्रशासन की टीम जब वर्ष 2025-26 की गिरदावरी यानि खसरे के आधार पर फसल की जानकारी जुटाने निकली तो यह स्थिति सामने आई। प्रशासन का कहना है कि इन खसरे की जमीन पर हुए निर्माण भी बिना अनुमति के हैं। यह स्थिति तब है जब भोपाल कलेक्टर अवैध कॉलोनियों पर लगातार सख्ती की बात कह रहे हैं।

200 पटवारियों की रिपोर्ट में हजारों खसरे हुए चिन्हित

जिले के करीब 200 पटवारियों ने रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 2000 ऐसे खसरे मिले जिन पर खेती की बजाय कॉलोनियों की फसल लहलहा रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि मंगलवार को गिरदावरी की अंतिम रिपोर्ट जमा करनी थी। यह आंकड़े प्रशासन के लिए चेतावनी की तरह हैं। खसरेवार आंकड़े यह बताने में मदद करते हैं कि जिले की कृषि भूमि पर किस तरह की फसल है और कितनी पैदावार हुई। लेकिन हालात यह हैं कि हजारों खसरे पर खेतों की जगह घर और दुकानें उग आई हैं।

जिले की 1.71 लाख खसरे और कृषि भूमि की स्थिति

भोपाल जिले की जमीन को 1.71 लाख खसरों में बांटा गया है, जिसमें करीब सवा लाख खसरे कृषि भूमि के हैं। जिला प्रशासन पिछले कुछ सालों से खसरावार गिरदावरी कर रहा है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि किस खसरे की जमीन पर कौन सी फसल है और कितना रकबा खेती के लिए उपलब्ध है। इसी आधार पर जिले और राज्य में कृषि उत्पादन और फसल की जानकारी तैयार की जाती है। लेकिन अब यह आंकड़े गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि हजारों खसरे पर खेती की जगह अवैध निर्माण उभर चुके हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और अवैध कॉलोनियों की पहचान

जिला प्रशासन ने हुजूर में 139 अवैध कॉलोनियों की पहचान की है। इनमें से 70 से अधिक अवैध कॉलोनियां कोलार क्षेत्र में हैं, जबकि 50 से अधिक गोविंदपुरा नजूल में हैं। अब जो 2000 खसरों की जमीन पर निर्माण हुए हैं, वे भी बिना अनुमति के हैं। प्रशासन ने कुछ अवैध निर्माणों को ध्वस्त भी किया है, लेकिन हालात यह हैं कि खेतों की जगह अवैध कॉलोनियां तेजी से उग रही हैं। यह मामला राजधानी की कृषि भूमि की सुरक्षा और कानून के कार्यान्वयन पर सवाल खड़ा करता है।