MP News: ग्वालियर से संचालित म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा. साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया

MP News: मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों की जांच के दौरान एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। अब तक पुलिस अन्य राज्यों जैसे दिल्ली हरियाणा गुजरात महाराष्ट्र बंगाल और बिहार से म्यूल खाते यानी किराये के बैंक खातों को खुलवाने वाले बिचौलियों और खाताधारकों को पकड़ती रही है। लेकिन हाल में ग्वालियर से ही संचालित एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मनीष यादव और ईशू रजक नाम के दो बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह सामने आया कि ये लोग जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाकर उन्हें आसान पैसे कमाने का लालच देते थे और उनके बैंक खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करते थे।

सस्ते दामों में बेचे जा रहे थे बैंक खाते और फंसाए जा रहे थे लोग

पुलिस जांच में सामने आया कि बिचौलिये लोगों को बैंक खाता खुलवाने या अपने मौजूदा खाते को किराये पर देने के बदले पैसे देने का झांसा देते थे। नए खाते के लिए लगभग 10 हजार रुपये दिए जाते थे जबकि पहले से खुले खातों पर हर ट्रांजेक्शन के आधार पर कमीशन तय किया जाता था। ये लोग बैंक के आसपास घूमकर जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की पहचान करते थे और उन्हें जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर फंसा लेते थे। इस पूरे खेल में लोगों के बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगों द्वारा अवैध लेनदेन के लिए किया जाता था जिससे असली खाताधारक कानूनी मुश्किलों में भी फंस जाते थे।

टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए विदेशों से जुड़ा नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि इन बिचौलियों के मोबाइल फोन में मौजूद डेटा के आधार पर उनका संपर्क विदेशों में बैठे साइबर ठगों से था। ये ठग चीन कंबोडिया और दुबई जैसे देशों से ऑपरेट कर रहे थे और टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए म्यूल खातों की मांग करते थे। पुलिस को जानकारी मिली है कि ये बिचौलिये करीब 220 टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हुए थे जहां पर खातों की डिमांड और सप्लाई का पूरा नेटवर्क चलता था। ठगी की रकम इन खातों में जमा होने के बाद उसे क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से विदेश भेजा जाता था ताकि ट्रांजेक्शन को ट्रेस करना मुश्किल हो सके।

कई खातों और लेयर सिस्टम के जरिए चल रहा था ठगी का संगठित कारोबार

इस पूरे नेटवर्क में ठग कई लेयर में काम करते थे जहां एक खाते से पैसा आने के बाद उसे आगे दूसरे और तीसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता था ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। पुलिस के अनुसार इन बिचौलियों ने ग्वालियर और आसपास के जिलों के लोगों के करीब 122 बैंक खातों को बेचने या इस्तेमाल करने का रिकॉर्ड तैयार किया था। अधिकांश मामलों में निजी बैंकों के खातों का उपयोग किया जाता था क्योंकि ऑनलाइन खाता खोलने की प्रक्रिया आसान होती है। ठगी की रकम में से लगभग 20 प्रतिशत कमीशन के रूप में काटकर बाकी राशि को क्रिप्टो में बदलकर ठगों तक पहुंचाया जाता था। यह पूरा नेटवर्क साइबर अपराध के नए और जटिल तरीकों को दर्शाता है जिसे रोकने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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