MP News: अतिक्रमण कार्रवाई के बीच उमा भारती का विरोध. हाथ ठेला लगाकर जताई गरीबों से एकजुटता

MP News:  मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब उमा भारती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में वे टीकमगढ़ की सिविल लाइन रोड पर सड़क किनारे पोहा और जलेबी बेचती नजर आईं। उनका यह कदम किसी सामान्य गतिविधि से अलग था क्योंकि इसके पीछे एक स्पष्ट संदेश छिपा था। उन्होंने छोटे दुकानदारों और ठेले वालों के समर्थन में यह पहल की। उनका उद्देश्य यह दिखाना था कि गरीब विक्रेताओं की रोजी रोटी सुरक्षित रहनी चाहिए और प्रशासन को संतुलित कार्रवाई करनी चाहिए। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में चर्चा को जन्म दिया।

अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद बढ़ा विवाद

दरअसल टीकमगढ़ में नगर पालिका और प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था। इस दौरान कई छोटे दुकानदारों और हाथ ठेला वालों की दुकानें जेसीबी की मदद से हटा दी गईं। इसी कार्रवाई के बाद विवाद शुरू हुआ। उमा भारती ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि बिना उचित व्यवस्था के छोटे व्यापारियों को हटाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें वैकल्पिक स्थान दिया जाना चाहिए था ताकि उनका रोजगार प्रभावित न हो। इस मुद्दे ने प्रशासन और स्थानीय नेताओं के बीच बहस को भी जन्म दिया और मामला राजनीतिक रंग लेने लगा।

ठेला लगाकर किया प्रतीकात्मक विरोध और समर्थन

मंगलवार की सुबह उमा भारती स्वयं सिविल लाइन रोड पर पहुंचीं और एक हाथ ठेला लगाकर पोहा जलेबी बेचना शुरू किया। यह एक प्रतीकात्मक विरोध था जिसका उद्देश्य हटाए गए दुकानदारों के पक्ष में आवाज उठाना था। उन्होंने स्थानीय छोटे विक्रेताओं को वापस बुलाया और उन्हें फिर से अपने ठेले लगाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि प्रशासन को पहले उचित स्थान चिन्हित करना चाहिए और उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई करनी चाहिए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनके इस कदम को समर्थन और सराहना के रूप में देखा।

प्रशासन से अपील और आगे की स्थिति

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उमा भारती ने प्रशासन से स्पष्ट अपील की कि गरीब दुकानदारों की रोजी रोटी पर असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्षदों द्वारा पहले स्थान चिन्हित करने का सुझाव दिया गया था और प्रशासन को उसी दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं प्रशासन से बात करेंगी और सुनिश्चित करेंगी कि हटाए गए ठेले वापस लगाए जाएं। यह मामला अब स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और आगे इस पर क्या निर्णय होता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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