MP News: बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। अदालत ने उनकी अपील पर मध्य प्रदेश पुलिस से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आगे की प्रक्रिया जवाब आने के बाद ही बढ़ेगी। इस याचिका में सजा को चुनौती दी गई है और राहत की मांग की गई है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 15 अप्रैल तय की है। इस सुनवाई को इस केस के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी पर आगे की कानूनी दिशा निर्भर करेगी।
सजा और विधायकी समाप्ति का पूरा घटनाक्रम.
दो अप्रैल को एमपी एमएलए कोर्ट ने राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी विधायकी समाप्त हो गई और दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो गई। हालांकि कोर्ट ने उन्हें साठ दिनों की अंतरिम जमानत दी थी ताकि वे उच्च न्यायालय में अपनी अपील दाखिल कर सकें। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल बढ़ गई है। दतिया सीट खाली होने से राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं और सभी दल आने वाले उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। यह घटनाक्रम न केवल एक कानूनी मामला है बल्कि इसका सीधा असर राजनीतिक संतुलन पर भी देखने को मिल रहा है।
भाजपा की सक्रियता और संभावित रणनीति.
इसी बीच मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से उनके निवास पर मुलाकात की। यह बैठक करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चली। इस मुलाकात को दतिया में संभावित उपचुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया सीट लंबे समय तक नरोत्तम मिश्रा का गढ़ रही है और वे यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं। पिछली बार इस सीट पर राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में भाजपा इस सीट को फिर से अपने कब्जे में लेने के लिए सक्रिय दिखाई दे रही है और पार्टी स्तर पर लगातार रणनीतिक बैठकें की जा रही हैं।
आगे की सुनवाई और राजनीतिक भविष्य की दिशा.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। यदि अदालत राहत देती है तो राजेंद्र भारती के राजनीतिक भविष्य को नई दिशा मिल सकती है। वहीं यदि निर्णय उनके खिलाफ रहता है तो दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। इस मामले ने न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। फिलहाल दोनों ही पक्षों की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं और आने वाला दिन प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


