Bargi Cruise Tragedy: बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए पर्यटकों के परिवारों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है। हादसे की खबर फैलते ही दिल्ली, तमिलनाडु और नेपाल की राजधानी काठमांडू तक से परिजन लगातार फोन कर अपने अपनों की जानकारी लेने लगे। हर कॉल में डर और उम्मीद दोनों साफ झलक रहे थे कि उनके परिजन सुरक्षित हों।
कलेक्ट्रेट में बना कंट्रोल रूम, लगातार बजती रहीं फोन की घंटियां
हादसे के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के कक्ष क्रमांक-9 में कंट्रोल रूम स्थापित किया, जहां स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। सुबह से लेकर देर शाम तक फोन कॉल्स का सिलसिला जारी रहा और हर कॉल में लोग अपने परिजनों की सुरक्षा की जानकारी लेते रहे। प्रशासनिक टीमों ने स्थिति को संभालने के लिए पूरी व्यवस्था सक्रिय रखी और हर सवाल का जवाब देने का प्रयास किया।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और सैलानियों की जानकारी अपडेट
क्रूज पर सवार सैलानियों की स्थिति जानने के लिए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और कर्मचारियों को लगातार अपडेट उपलब्ध कराए। कंट्रोल रूम में मौजूद टीम ने कॉल करने वालों को सटीक और समय पर जानकारी देने का काम किया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अफवाहों को रोकना और वास्तविक स्थिति लोगों तक पहुंचाना था, ताकि किसी भी तरह की गलत जानकारी न फैले।
काठमांडू के यात्रियों की सुरक्षित वापसी से मिली राहत
इस बीच राहत की खबर यह रही कि काठमांडू के मंजू खड़गा, पूनम थापा और सरस्वती को सुरक्षित बचा लिया गया है। उनके परिजनों ने भी कंट्रोल रूम से संपर्क कर उनकी कुशलक्षेम जानी, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली। इस घटना ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन और त्वरित सूचना प्रणाली की अहमियत को सामने रखा है और प्रशासन की भूमिका पर भी लोगों की नजर बनी रही।


