फर्जी डिग्री से इलाज, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का चौंकाने वाला खुलासा
सोचिए, जिस डॉक्टर पर आप अपनी सेहत और जिंदगी का भरोसा करते हैं, उसकी डिग्री ही फर्जी निकले तो क्या होगा? मध्य प्रदेश में सामने आया ऐसा ही मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में कई ऐसे कथित डॉक्टर सामने आए हैं जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे थे।
दमोह से शुरू हुई जांच, पूरे प्रदेश में फैला मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत दमोह जिले से हुई, जहां एक डॉक्टर की डिग्री को लेकर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर के संजीवनी क्लीनिकों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। जांच का दायरा बढ़ते ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे।
नौ डॉक्टरों पर गिरी गाज
एनएचएम की शुरुआती जांच में नौ ऐसे डॉक्टर पकड़े गए हैं जिनकी डिग्रियां और दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। विभाग ने तत्काल प्रभाव से उन्हें सेवा से हटा दिया है। साथ ही उनके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले भी दर्ज कराए गए हैं। यह कार्रवाई संकेत देती है कि सरकार इस मामले को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
जांच के घेरे में और भी नाम
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार फिलहाल 10 और डॉक्टरों की सूची तैयार की गई है। इनके रजिस्ट्रेशन नंबर और शैक्षणिक दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो आने वाले दिनों में फर्जीवाड़े का दायरा और बड़ा हो सकता है।
मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
यह मामला केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। असली चिंता उन हजारों मरीजों की है जिनका इलाज ऐसे लोगों ने किया। गलत इलाज या गलत दवा किसी भी मरीज के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसलिए इस तरह के मामलों को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं माना जा सकता।
पूरे सिस्टम की होगी दोबारा पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सभी संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की नए सिरे से जांच के निर्देश दिए हैं। अब तक 81 डॉक्टरों के रिकॉर्ड की जांच की जा चुकी है और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।
मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों का यह खुलासा केवल कुछ लोगों की धोखाधड़ी की कहानी नहीं है। यह स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी प्रणाली की भी परीक्षा है। मरीजों का भरोसा किसी भी चिकित्सा व्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी होता है। ऐसे में पारदर्शिता और सख्त सत्यापन ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी रास्ता है।


