देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें 7 जून से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति संकट के कारण यह फैसला लिया गया है।
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल तथा गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है। फरवरी के अंत में शुरू हुए क्षेत्रीय तनाव के बाद से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे ईंधन आयात की लागत में वृद्धि हुई है। हालांकि इस दौरान घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा गया था, लेकिन अब तेल विपणन कंपनियों ने बढ़ती लागत को देखते हुए कीमतों में संशोधन किया है।
गौरतलब है कि इससे पहले मार्च महीने में भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। तीन महीनों के भीतर यह दूसरी बड़ी वृद्धि है, जिससे आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, हालिया बढ़ोतरी से पहले सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 703 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण लागत और बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था।
इससे पहले सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी कई बार बढ़ोतरी की थी। मई और जून के दौरान कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ाए गए थे, जिससे होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों की लागत भी बढ़ी है।
हालांकि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में गैस की कमी नहीं है और सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि कच्चे तेल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है तथा जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
घरेलू गैस की कीमतों में हुई इस नई बढ़ोतरी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर कीमतों में और बदलाव संभव माना जा रहा है।


