पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का डर बढ़ता जा रहा है। सोलापुर में GBS के कारण पहली मौत की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 9 जनवरी को पुणे में इस सिंड्रोम का पहला मामला सामने आया था। अब तक 101 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें से 16 की हालत गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
बैक्टीरिया से फैल रहा है सिंड्रोम
GBS का मुख्य कारण कैंपीलोबैक्टर जेजुनी नामक बैक्टीरिया है। पहले मरीज की जांच में यह बैक्टीरिया पाया गया था। पुणे में GBS के मामलों में तेजी आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पानी के नमूनों की जांच की, लेकिन इसमें कैंपीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया नहीं मिला।
स्वास्थ्य विभाग ने दी सलाह
अधिकारियों ने नागरिकों को गर्म पानी पीने और भोजन को अच्छी तरह पकाने की सलाह दी है। विभाग ने 25,578 घरों का सर्वे किया है, जिसमें दो मरीज सामान्य रूप से मिलना आम था। हालांकि, हाल के दिनों में मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जो चिंताजनक है।
GBS का इलाज महंगा
GBS का इलाज काफी महंगा है। एक इंजेक्शन की कीमत 20,000 रुपये है। मरीज को इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG) इंजेक्शन दिए जाते हैं। एक बुजुर्ग मरीज के इलाज में कम से कम 13 इंजेक्शन लगते हैं।
डॉक्टरों की चिंता
GBS से मरीजों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक, 80 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल से छुट्टी के बाद सामान्य रूप से चलने-फिरने में 6 महीने लगते हैं, जबकि 20 प्रतिशत मरीजों को एक साल तक का समय लगता है।
स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर GBS के बढ़ते मामलों को लेकर सतर्क हैं और इसे रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।