“अपनापन” की किताब… मंच पर दिखा अकेलापन… अपनी ही कैबिनेट का समर्थन नहीं जुटा पाए शिवराज!

नई दिल्ली। दिल्ली के पूसा स्थित NASC कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का विमोचन बड़े नामों के बीच होना था… लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा किताब की नहीं, बल्कि कार्यक्रम में दिखी “सियासी दूरी” की हो रही है।

पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, मनोहर लाल खट्टर, गिरिराज सिंह और पुष्कर सिंह धामी, रेखा गुप्ता, जैसे चेहरे मौजूद रहे… लेकिन मध्य प्रदेश भाजपा और शिवराज की अपनी सियासी टीम के कई बड़े चेहरे कार्यक्रम से गायब रहे।

दिल्ली में हुए इस आयोजन ने भाजपा के भीतर चल रही खामोश राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया। सवाल उठ रहे हैं कि जिस शिवराज सिंह चौहान ने दो दशक तक मध्य प्रदेश भाजपा का चेहरा बनकर पार्टी को सत्ता दिलाई, उनके इतने अहम कार्यक्रम में प्रदेश के कई मंत्री और संगठन के नेता आखिर क्यों नहीं पहुंचे?

“अपनापन” की किताब… मंच पर दिखा अकेलापन… अपनी ही कैबिनेट का समर्थन नहीं जुटा पाए शिवराज!

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “अपनापन” नाम की किताब के विमोचन में ही शिवराज को अपनी ही सियासत में “अपनापन” नहीं मिल पाया। कार्यक्रम में अपेक्षा के मुकाबले कम राजनीतिक उपस्थिति ने यह संदेश भी दिया कि दिल्ली दरबार में अब शिवराज की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 35 साल के रिश्तों और “अपनापन” पर लिखी किताब के मंच पर ही शिवराज राजनीतिक अकेलेपन का संदेश दे गए। दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा के भीतर भी कानाफूसी तेज हो गई है।

भाजपा के अंदरूनी समीकरणों पर नज़र रखने वाले इसे केवल एक सामान्य अनुपस्थिति नहीं मान रहे, बल्कि इसे सत्ता और संगठन के बदलते शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही चर्चा रही “क्या शिवराज अब पार्टी में अकेले पड़ते जा रहे हैं?”

सियासी चर्चा यह भी है कि जिस नेता ने मध्य प्रदेश में भाजपा को वर्षों तक खड़ा रखा, उसी शिवराज के कार्यक्रम में प्रदेश के कई मंत्री और नेता नहीं पहुंचे। ऐसे में विपक्ष को भी तंज कसने का मौका मिल गया।

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