एमपी के कर्मचारियों को 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा

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By Sharma Published On: September 2, 2024

मध्यप्रदेश सरकार सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक नई स्वास्थ्य बीमा योजना लाने जा रही है, जो उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की आयुष्मान योजना जैसी होगी। इस योजना का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है, जिसमें कर्मचारियों को 5 लाख रुपए तक सामान्य और 10 लाख रुपए तक गंभीर बीमारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें इलाज के लिए आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े। योजना के तहत कर्मचारियों के वेतन से एक निश्चित अंशदान लिया जाएगा, जो 250 रुपए से 1000 रुपए तक हो सकता है। राज्य सरकार शेष राशि का वहन करेगी।

अभी मध्यप्रदेश सरकार के कर्मचारियों को केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत निर्धारित दरों पर इलाज की प्रतिपूर्ति मिलती है। हालांकि, यह राशि पहले कर्मचारी को खुद खर्च करनी होती है और बाद में बिल जमा करने पर रिफंड किया जाता है। इसके अलावा, सीजीएचएस की दरें बाजार दरों से काफी कम हैं, जिससे अस्पतालों में इलाज कराना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

प्रस्तावित योजना का नाम “मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना” रखा गया है। इसका लाभ प्रदेश के करीब 15 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स के परिवारों को मिलेगा। योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा होगी, जिसमें सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए तक और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार ने इस तरह की योजना का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन सरकार बदलने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। अब शिवराज सरकार ने इस प्रस्ताव को पुनः शुरू किया है।

सीजीएचएस की दरें बाजार दरों से काफी कम हैं, जिससे अस्पताल इलाज करने में हिचकिचाते हैं या अतिरिक्त राशि की मांग करते हैं। निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए भी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं, जैसे कि सरकारी अस्पताल से रेफर करवाना और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय से स्वीकृति लेना।

यह नई योजना सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें इलाज के लिए भारी खर्च वहन नहीं करना पड़ेगा और कैशलेस सुविधा के माध्यम से उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। योजना के अंतिम रूप से लागू होने के बाद कर्मचारियों को अधिक स्पष्टता मिलेगी कि यह कैसे कार्य करेगी और इसके लाभ कैसे उठाए जा सकते हैं।